होली के बाद दो सीटों पर घमासान, भाजपा में ‘सरप्राइज’ की तैयारी, तो कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष की ‘दिली ख्वाहिश’ ने गरमाया सियासी पारा!
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर/सक्ती। छत्तीसगढ़ की राजनीति में मार्च का महीना बड़े बदलावों की दस्तक दे रहा है। प्रदेश से राज्यसभा की दो सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से गणित के हिसाब से एक भाजपा और एक कांग्रेस के पाले में जानी तय है। जहाँ भाजपा में किसी ‘अनाम’ चेहरे के उभार की सुगबुगाहट है, वहीं कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत की राज्यसभा जाने की इच्छा ने एक नई सियासी पटकथा लिख दी है। यह केवल एक सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि सक्ती विधानसभा में ‘पीढ़ी परिवर्तन’ की तैयारी मानी जा रही है।
महंत की ‘दिल्ली वाली’ मुराद: एक तीर से दो निशाने ?
सक्ती से विधायक और कद्दावर नेता डॉ. चरणदास महंत सार्वजनिक मंचों से कई बार राज्यसभा जाने की अपनी इच्छा जाहिर कर चुके हैं। राजनीति के गलियारों में चर्चा है कि महंत का दिल्ली जाना केवल उनके संसदीय सफर का अगला पड़ाव नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी रणनीतिक बिसात है:
- विरासत की राजनीति: यदि डॉ. महंत राज्यसभा जाते हैं, तो उन्हें सक्ती विधानसभा सीट छोड़नी होगी।
- सूरज का उदय: चर्चा जोरों पर है कि महंत दंपत्ति (डॉ. महंत और सांसद ज्योत्स्ना महंत) अब अपने पुत्र सूरज महंत को चुनावी राजनीति में उतारने का मन बना चुके हैं। सूरज लंबे समय से अपने माता-पिता के साथ क्षेत्र में सक्रिय हैं और संगठन की नब्ज पहचान रहे हैं।
- उपचुनाव का समीकरण: डॉ. महंत के इस्तीफे के बाद रिक्त होने वाली सक्ती सीट से सूरज महंत का राजनैतिक उदय हो सकता है, जिससे परिवार की सियासी विरासत सुरक्षित बनी रहेगी।
कांग्रेस में दावेदारों की ‘लंबी कतार’
भले ही महंत का नाम सबसे ऊपर हो, लेकिन कांग्रेस के भीतर ‘दिल्ली दरबार’ के सामने कई और विकल्प भी मौजूद हैं:
- दीपक बैज: प्रदेश अध्यक्ष के नाते आदिवासी कोटे से मजबूत दावेदार।
- टी.एस. सिंहदेव: पूर्व उपमुख्यमंत्री, जिनका कद और अनुभव दिल्ली में सर्वमान्य है।
- अमरजीत भगत: आदिवासी समाज के बड़े नेता और पूर्व मंत्री, जो अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं।
भाजपा: शांत समंदर में ‘सरप्राइज’ की लहर
दूसरी ओर, सत्ताधारी भाजपा में फिलहाल सन्नाटा है, लेकिन यह किसी बड़े धमाके का संकेत हो सकता है। अंदरखाने की खबरें बताती हैं कि:
- पार्टी इस बार अनुसूचित जाति (SC) या सामान्य वर्ग से किसी को मौका दे सकती है।
- पिछली बार जिस तरह रायगढ़ से देवेंद्र प्रताप सिंह का नाम अचानक आया था, वैसी ही रणनीति इस बार भी अपनाई जा सकती है।
- ओबीसी वर्ग से भी कुछ पूर्व विधायक दिल्ली की दौड़ में सक्रिय हो चुके हैं।
दिल्ली दरबार के फैसले पर टिकी निगाहें
छत्तीसगढ़ की राजनीति अब उस मोड़ पर है जहाँ एक इस्तीफा (सक्ती विधायक) और एक नियुक्ति (राज्यसभा) पूरे प्रदेश की सत्ता का समीकरण बदल सकती है। क्या कांग्रेस हाईकमान महंत की ‘दिली ख्वाहिश’ पूरी कर सूरज महंत के लिए रास्ता साफ करेगा? या फिर भाजपा कोई ऐसा ‘नहले पे दहला’ मारेगी जो विपक्ष के सारे समीकरण ध्वस्त कर दे?
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