बड़ी खबर : जेल से बाहर आए चैतन्य बघेल : खुद ड्राइविंग सीट पर बैठकर बेटे को लेने पहुंचे भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष महंत भी रहे साथ

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170 दिनों बाद जेल से रिहा, गाड़ी की छत पर बैठकर चैतन्य ने किया अभिवादन, ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी से गूंजा रायपुर

नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर |छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में करीब 170 दिनों तक जेल में रहने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल शनिवार शाम रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा हो गए। इस रिहाई का सबसे भावुक और चर्चा का विषय वह पल रहा, जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खुद कार की ड्राइविंग सीट पर बैठकर अपने बेटे को लेने जेल की दहलीज तक पहुंचे।

शक्ति प्रदर्शन और भावनाएं : एक ही कार में दिग्गज

​जेल के बाहर का नजारा किसी बड़े राजनीतिक विजय उत्सव जैसा था।

  • ​पिता बने सारथी: भूपेश बघेल ने खुद गाड़ी चलाकर संदेश दिया कि वे इस कठिन समय में अपने परिवार और सत्य के साथ मजबूती से खड़े हैं।
  • ​दिग्गजों का साथ: कार की अगली सीट पर भूपेश बघेल के बगल में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत बैठे नजर आए, जो इस लड़ाई में कांग्रेस की एकजुटता को दर्शाता है।
  • ​गाड़ी की छत पर चैतन्य: जैसे ही कार जेल परिसर से बाहर निकली, चैतन्य बघेल गाड़ी के ऊपर बैठ गए और हाथ जोड़कर हजारों समर्थकों का अभिवादन स्वीकार किया। कार्यकर्ताओं ने उन पर फूलों की बारिश कर दी।

170 दिन बाद ‘न्याय’ का संयोग

​चैतन्य बघेल 18 जुलाई 2025 (अपने जन्मदिन) से जेल में बंद थे। आज 170वें दिन उनकी रिहाई हुई। भूपेश बघेल ने इसे एक अद्भुत संयोग बताते हुए कहा:

“चैतन्य अपने जन्मदिन पर जेल गया था और आज अपने बेटे (मेरे पोते) के जन्मदिन पर वापस घर आ रहा है। सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। यह षड्यंत्रकारियों के मुंह पर तमाचा है।”

पूरी ताकत के साथ जुटे कांग्रेसी

​जेल के बाहर उमड़े जनसैलाब ने इसे एक बड़े शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया:

  1. ​ढोल-नगाड़े और पटाखे: जेल के मुख्य द्वार से लेकर सड़क तक समर्थकों ने जमकर आतिशबाजी की।
  2. ​कार्यकर्ताओं का जोश: ‘भूपेश बघेल जिंदाबाद’ और ‘न्याय की जीत’ के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।
  3. ​सुरक्षा के कड़े इंतजाम: भारी भीड़ और वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए जेल के बाहर पुलिस बल तैनात रहा।

​कानूनी राहत की बड़ी जीत

​चैतन्य बघेल को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से ED (प्रवर्तन निदेशालय) और ACB/EOW (एंटी-करप्शन ब्यूरो) दोनों द्वारा दर्ज मामलों में जमानत मिली है। एजेंसियों ने उन पर शराब सिंडिकेट के संरक्षक होने और करोड़ों के लेन-देन का आरोप लगाया था, जिसे बघेल परिवार शुरू से ही राजनीति से प्रेरित बताता रहा है।

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