Exclusive: ‘राधे-राधे’ बोलकर जेब में रखे रिश्वत के 50 हजार, सलाखों के पीछे रची जा रही थी वसूली की समानांतर सरकार
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेन्द्रगढ़। छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़ जिले से भ्रष्टाचार और रसूख की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने जेल प्रशासन की शुचिता पर कालिख पोत दी है। मनेन्द्रगढ़ उपजेल में पदस्थ जेल प्रहरी संतोष तिवारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे एक विचाराधीन कैदी के परिजनों से सरेआम 50,000 रुपये की रिश्वत लेते कैमरे में कैद हुए हैं।
वीडियो की इनसाइड स्टोरी: ‘भक्ति’ की आड़ में ‘उगाही’ का खेल
वायरल वीडियो कैदी के परिजनों के घर का बताया जा रहा है। वीडियो की शुरुआत में प्रहरी संतोष तिवारी बड़े ही शालीन अंदाज में “राधे-राधे” बोलकर घर में दाखिल होते हैं। लेकिन इस धार्मिक संबोधन के पीछे का इरादा बेहद अपवित्र था।

- पैसों की गिनती: सोफे पर बैठकर प्रहरी तिवारी बेखौफ होकर नोटों की गड्डियां गिनते नजर आ रहे हैं।
- प्रकरण पर डील: पैसे गिनने के साथ-साथ वे केस (प्रकरण) को लेकर परिजनों से सेटिंग की बातें भी कर रहे हैं।
- जेब के हवाले रकम: पूरी तसल्ली करने के बाद संतोष तिवारी रिश्वत की रकम को अपनी जेब के हवाले कर देते हैं।
जेल के भीतर ‘आतंक’ का साम्राज्य!
सूत्रों की मानें तो संतोष तिवारी पर लगे आरोप केवल आर्थिक भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं हैं। उपजेल में बंद कैदियों और उनके परिजनों ने प्रहरी पर गंभीर आरोप लगाए हैं:
- अमानवीय व्यवहार: कैदियों के साथ गाली-गलौज और जानवरों जैसा बर्ताव।
- प्रताड़ना: मानसिक और शारीरिक रूप से कैदियों को तोड़ना ताकि वे वसूली के लिए मजबूर हो जाएं।
- अवैध वसूली: सुविधा देने या प्रताड़ना रोकने के नाम पर परिजनों से मोटी रकम की डिमांड।
प्रशासनिक मिलीभगत या मेहरबानी ?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जिला प्रशासन और जेल विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है।
सवाल यह है कि संतोष तिवारी पिछले कई सालों से एक ही स्थान (मनेन्द्रगढ़) पर कैसे जमे हुए हैं?
नियमतः संवेदनशील पदों पर बैठे कर्मचारियों का समय-समय पर तबादला अनिवार्य है, ताकि वे अपना ‘नेटवर्क’ न बना सकें। लेकिन संतोष तिवारी का वर्षों से एक ही जेल में पदस्थ रहना यह दर्शाता है कि उन्हें ऊंचे रसूख या विभागीय साठगांठ का संरक्षण प्राप्त है। इसी लंबी पदस्थापना ने उन्हें इतना बेखौफ बना दिया कि वे जेल के भीतर अपनी एक “समानांतर व्यवस्था” चलाने लगे।
अब कार्रवाई का इंतजार
वीडियो सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। आम जनता अब यह पूछ रही है कि क्या ‘राधे-राधे’ जपकर भ्रष्टाचार करने वाले इस प्रहरी पर जेल विभाग कोई कड़ा हंटर चलाएगा? या फिर जांच के नाम पर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
देखना होगा कि मनेन्द्रगढ़ पुलिस और जेल मुख्यालय इस “कैमरा-कैद” रिश्वतखोरी पर क्या एक्शन लेते हैं।
नोट : नई पहल इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
About The Author










































