नई पहल न्यूज नेटवर्क। पंडरिया/रायपुर। क्षेत्रीय विधायक भावना बोहरा लगातार धर्मांतरण के चुके लोगो की घर वापसी करवा रही है। इसी क्रम में उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र पंडरिया के गांव में पैर पखारकर घर वापसी कराई।
बजट सत्र में ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ का शंखनाद
सिर्फ सामाजिक प्रयासों तक सीमित न रहते हुए, भावना बोहरा अब इसे विधायी मजबूती देने जा रही हैं। उन्होंने घोषणा की है कि कल से शुरू हो रहे विधानसभा के बजट सत्र में ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ लाया जाएगा। यह विधेयक प्रदेश की सांस्कृतिक सुरक्षा के लिए एक ‘सुरक्षा कवच’ की तरह काम करेगा।

विधेयक के 5 बड़े फायदे और प्रावधान:
- धर्मांतरण पर सख्त लगाम: छल-कपट, प्रलोभन या दबाव बनाकर कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर पूरी तरह रोक लगेगी।
- 60 दिन पूर्व सूचना अनिवार्य: किसी भी धर्म परिवर्तन से पहले प्रशासन को 60 दिन की पूर्व सूचना देनी होगी, जिससे ‘गुप्त धर्मांतरण’ का खेल खत्म होगा।
- कठोर सजा और जुर्माना: विधेयक में उल्लंघन करने वालों के लिए 10 साल तक की जेल और भारी आर्थिक जुर्माने का प्रावधान होगा।
- आरक्षण लाभ की स्पष्टता: मूल धर्म छोड़ने वालों के लिए आरक्षण और अन्य सुविधाओं के प्रावधानों पर स्पष्ट नियम होंगे, जिससे ‘दोहरे लाभ’ की स्थिति पर नियंत्रण लगेगा।
- सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण: यह विधेयक वनांचल की पारंपरिक मान्यताओं और आदिवासी रीति-रिवाजों को बाहरी हस्तक्षेप से बचाएगा।
भावना बोहरा: सांस्कृतिक अस्मिता की नई ‘दीदी’
पंडरिया विधानसभा के कुल्हीडोंगरी में 165 नागरिकों की वापसी के साथ ही अब तक कुल 400 से अधिक लोग भावना बोहरा के प्रयासों से अपनी जड़ों की ओर लौट चुके हैं। जिस तरह वे वनांचल के दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर लोगों की आरती उतारती हैं और उनके पैर पखारती हैं, उसने उन्हें क्षेत्र में ‘सांस्कृतिक संरक्षक’ के रूप में स्थापित कर दिया है।



धर्मांतरण केवल मजहब बदलना नहीं, बल्कि एक संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास है। हमारा ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ छत्तीसगढ़ की भोली-भाली जनता को उन शक्तियों से बचाएगा जो विकास की आड़ में भ्रम फैलाते हैं। डबल इंजन की सरकार विकास भी कर रही है और विरासत की रक्षा भी। हम सुनिश्चित करेंगे कि छत्तीसगढ़ का गौरव सुरक्षित रहे।
भावना बोहरा, विधायक
पैर पखारकर दिया सम्मान, आंखों में छलकी खुशी
कुल्हीडोंगरी के प्राथमिक शाला परिसर में आयोजित इस समारोह का सबसे भावुक क्षण वह था जब विधायक भावना बोहरा ने आदिवासी परिवारों के सदस्यों को आसन पर बैठाकर उनके चरण धोए और आरती उतारी। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि यह केवल धर्म परिवर्तन नहीं, बल्कि अपनी खोई हुई अस्मिता और आत्मगौरव को पुनः प्राप्त करने का उत्सव है।
पंडरिया में अब तक 400 से अधिक की वापसी
भावना बोहरा का यह अभियान निरंतर जारी है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पंडरिया विधानसभा में अब तक बड़े पैमाने पर घर वापसी हुई है:
- कुल्हीडोंगरी: 165 नागरिक
- नेऊर क्षेत्र: 115 नागरिक
- कुई-कुकदुर क्षेत्र: 70 नागरिक
- ग्राम दमगढ़: 50 नागरिक कुल मिलाकर अब तक 400 से अधिक आदिवासी नागरिक मुख्यधारा में लौट चुके हैं।




