आरंग के समोदा में फूटा सांसद बृजमोहन अग्रवाल का गुस्सा, एडीएम-एसडीएम को 3 दिन की डेडलाइन, प्रशासनिक महकमे में हड़कंप !
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर/आरंग। समोदा में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ उस वक्त प्रशासनिक अधिकारियों के लिए ‘कयामत की रात’ जैसा साबित हो गया, जब रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। जनता के बीच बैठे सांसद के सामने जब भ्रष्टाचार की परतें खुलीं, तो उन्होंने आव देखा न ताव, मंच से ही नायब तहसीलदार गजानंद सिदार की क्लास लगा दी। सांसद के तेवर इतने तल्ख थे कि भरी सभा में कुछ मिनटों के लिए सन्नाटा पसर गया और अधिकारियों के पसीने छूट गए।
मामले में ऑन-द-स्पॉट ऐक्शन लेते हुए सांसद ने एडीएम और एसडीएम को तलब किया और दोटूक कह दिया— “3 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट मेरी टेबल पर होनी चाहिए!”

मंच से बरसे सांसद: “ये वसूली का खेल किसके शह पर चल रहा है ?”
’सुशासन तिहार’ में जब ग्रामीणों को अपनी बात रखने का मंच मिला, तो शिकायतों का सैलाब आ गया। ग्रामीणों ने नायब तहसीलदार गजानंद सिदार पर सीधे आरोप लगाया कि वे राजस्व के सीधे-सच्चे कामों को महीनों अटका कर रखते हैं और बिना ‘सुविधा शुल्क’ (रिश्वत) के फाइल आगे नहीं बढ़ती।
यह सुनते ही दिग्गज नेता बृजमोहन अग्रवाल का छत्तीसगढ़िया आक्रोश फूट पड़ा। उन्होंने अधिकारी को सामने खड़ा कर सीधे रीढ़ पर वार किया:
सबसे ज्यादा शिकायतें आपके ही खिलाफ आ रही हैं! जनता को पैसे किसको देने की बात कर रहे हो? ये जो लूट मची है, इसका हिस्सा ऊपर किस तक पहुंच रहा है, मुझे साफ-साफ बताओ?
‘यह सुशासन है, कुशासन की विदाई का वक्त है’ – आखिरी अल्टीमेटम
सांसद ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जनता को परेशान करने वाले अधिकारी अब अपनी बोरिया-बिस्तर समेट लें। उन्होंने कहा, “यह जनता की सरकार है। काम में हीलाहवाली, लेट-लतीफी और भ्रष्टाचार का दीमक अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर भविष्य में एक भी शिकायत दोबारा आई, तो सिर्फ विभागीय जांच नहीं होगी, बल्कि सीधे हवालात का रास्ता दिखाया जाएगा।”
एक्शन प्लान : 3 दिन में निपटेगा ‘साहब’ का हिसाब
मामले को ठंडे बस्ते में डालने के बजाय सांसद अग्रवाल ने मौके पर मौजूद उच्चाधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी:
- फाइलों का एक्सरे: एडीएम और एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं कि नायब तहसीलदार के पास लंबित पड़े एक-एक राजस्व मामले की कुंडली खंगाली जाए।
- रिश्वतखोरी की जांच: ग्रामीणों द्वारा पैसे मांगने के आरोपों की तत्काल जांच शुरू होगी।
- 72 घंटे की डेडलाइन: केवल 3 दिनों के भीतर पूरी जांच रिपोर्ट तैयार कर सांसद और उच्च कार्यालय को सौंपने का कड़ा अल्टीमेटम दिया गया है।
जनता ने बजाईं तालियां, भ्रष्ट अधिकारियों की उड़ी नींद
सांसद के इस ‘ऑन-स्पॉट’ फैसले के बाद समोदा कार्यक्रम स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। ग्रामीणों का कहना है कि सुशासन का असली मतलब आज देखने को मिला है। वहीं दूसरी ओर, इस कड़े रुख के बाद पूरे रायपुर जिले के राजस्व अमले में हड़कंप मच गया है। अब सबकी नजरें एडीएम और एसडीएम की उस रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो 3 दिन बाद आने वाली है।
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