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प्रकृति, पौराणिक आस्था और पर्यटन का संगम, सूरजपुर का सारासोर बना लोगों की आस्था का केंद्र

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सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित सारासोर आज आस्था और प्राकृतिक सुंदरता का अनोखा मेल बनकर उभर रहा है। महान नदी की निर्मल धारा जब दो ऊँची पहाड़ियों को चीरते हुए बहती है, तो उसके बीच स्थित प्राचीन मंदिर का दृश्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। सालभर यहां दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए पहुँचते हैं, जबकि छुट्टियों में यह क्षेत्र पिकनिक और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने वालों से गुलजार रहता है।

सारासोर का पौराणिक महत्व भी इसे खास बनाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनगमन काल में यह स्थान उनका विश्राम स्थल रहा था। पास ही स्थित पर्वत की प्रसिद्ध गुफा, जिसे लोग जोगी महाराज की गुफा कहते हैं, और सीता कुंड आज भी इस कथा को जीवंत करते हैं। माना जाता है कि यहीं माता सीता ने स्नान किया था और राम-सीता ने कुछ समय बिताकर इसी मार्ग से पहाड़ की दूसरी ओर प्रस्थान किया था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सारासोर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि कई नदियों के संगम से निर्मित अद्भुत प्राकृतिक दृश्य वाला स्थान है। इसे और बेहतर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रशासन ने पहल शुरू की है। पुरातत्व विभाग भी इसे पौराणिक धरोहर बताते हुए कई बार शासन को संरक्षण और विकास के लिए पत्र भेज चुका है। शासन स्तर पर भी इसे पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने की तैयारी की जा रही है।

सारासोर की अनछुई प्राकृतिक खूबसूरती, पहाड़ों को चीरती जलधारा और पौराणिक मंदिर इसे सूरजपुर का एक अनमोल रत्न बनाते हैं। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में उम्मीद है कि जल्द ही यह स्थल पूर्ण रूप से विकसित पर्यटन केंद्र के रूप में सामने आएगा, जिससे क्षेत्र की पहचान को नई ऊँचाई मिलेगी।

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