पहला संवाद : सारंगढ़-बिलाईगढ़ की कलेक्टर आईएएस पद्मिनी भोई साहू से खास बातचीत
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर | छत्तीसगढ़ के 36% भू-भाग पर अब महिला आईएएस अधिकारियों की मजबूत कमान है। राज्य के 33 में से 12 जिलों में कप्तानी संभाल रहीं इन महिला कलेक्टरों के प्रशासनिक अनुभवों, चुनौतियों और उनकी सोच को जनता के सामने लाने के लिए ‘नई पहल’ आज से एक खास सीरीज “36% कमान: महिला कलेक्टरों की जुबानी” का आगाज कर रहा है।

इस विशेष श्रृंखला की पहली कड़ी में हमारा पहला संवाद सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की कलेक्टर आईएएस पद्मिनी भोई साहू से हुआ। उन्होंने मैदानी प्रशासन में महिला नेतृत्व के संवेदनशीलता, जमीनी प्रभाव और स्वास्थ्य-पोषण के क्षेत्र में किए जा रहे अभूतपूर्व बदलावों पर खुलकर अपनी बात रखी।

छत्तीसगढ़ के 12 जिलों में महिला आईएएस अधिकारियों की तैनाती के बाद मैदानी प्रशासन में एक नया और संवेदनशील बदलाव देखने को मिल रहा है। इस प्रशासनिक व्यवस्था और महिला नेतृत्व के सकारात्मक प्रभावों पर सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की कलेक्टर आईएएस पद्मिनी भोई साहू ने नई पहल को बताया कि महिला प्रशासनिक प्रमुख होने से आम महिलाओं, छात्राओं और बच्चियों को अपनी समस्याएं साझा करने में काफी सहूलियत मिल रही है।
“स्कूलों और आंगनबाड़ियों के निरीक्षण में सहजता से अपनी बात रखती हैं बेटियां”

कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने कहा कि जब महिलाएं किसी महिला अधिकारी के संपर्क में आती हैं, तो वे अपनी समस्याओं और विचारों को बेहद खुलकर सामने रख पाती हैं।
उन्होंने बताया, “जब भी हम स्कूलों या आंगनबाड़ी केंद्रों का भ्रमण करते हैं, तो बेटियां अपनी बातों को बहुत सहजता से हमारे सामने रखती हैं। इससे हमें भी एक बड़ा सपोर्ट मिलता है कि हम उनकी जरूरतों और चिंताओं को सही तरीके से समझ सकें और उसी अनुरूप सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू कर सकें।”
मैदानी स्तर पर दिखा असर: कुपोषण और मातृ मृत्यु दर में कमी लाने पर फोकस

महिला नेतृत्व के प्रशासनिक परिणामों का जिक्र करते हुए कलेक्टर ने बताया कि जिले में स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में प्राथमिकता से काम किया जा रहा है:
- कुपोषण पर प्रहार: जिले में बीते तीन महीनों के भीतर कुपोषण को दूर करने के लिए लगातार और प्रभावी अभियान चलाए गए हैं।
- मातृ स्वास्थ्य सुरक्षा: गर्भवती महिलाओं की देखभाल और मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार विशेष प्रयास जारी हैं।
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