खेत की पगडंडियों से नीली जर्सी तक का सफर IPL 2026 में ‘ऑरेंज कैप’ झटकने वाले बिहार के समस्तीपुर के लाल की वो अनसुनी कहानी, जिसने सिलेक्टर्स को मजबूर कर दिया
नई पहल न्यूज नेटवर्क। नई दिल्ली / समस्तीपुर। उम्र महज 15 साल और 71 दिन। इस उम्र में जहां देश के अधिकांश किशोर स्कूल की किताबों और बोर्ड परीक्षाओं के तनाव से जूझ रहे होते हैं, वहीं बिहार के एक लड़के ने दुनिया के सबसे अमीर और ताकतवर क्रिकेट बोर्ड (BCCI) के सिलेक्टर्स के दरवाजों को अपने बल्ले की धमक से तोड़ दिया है। जी हां, समस्तीपुर के एक छोटे से गांव से निकले बाएं हाथ के विस्फोटक ओपनर वैभव सूर्यवंशी को इंग्लैंड और आयरलैंड के खिलाफ होने वाली आगामी टी-20 सीरीज के लिए सीनियर भारतीय टीम (Team India) में चुन लिया गया है। इसके साथ ही वैभव ने महान सचिन तेंदुलकर का 36 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास रच दिया है। वे भारत के क्रिकेट इतिहास में सीनियर नेशनल टीम में चुने जाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं। यह कहानी सिर्फ एक सिलेक्शन की नहीं है, बल्कि एक पिता के अटूट विश्वास और एक बच्चे के असाधारण टैलेंट की महागाथा है।

जीवनी : पिता ने खेत को बनाया मैदान, लोन लेकर संवारा भविष्य
वैभव सूर्यवंशी का जन्म 27 मार्च 2011 को बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर प्रखंड के एक छोटे से गांव कशबे आहार में हुआ था। वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी पेशे से एक साधारण किसान हैं। संजीव खुद क्रिकेट के बेहद शौकीन थे, लेकिन आर्थिक तंगहाली के कारण उनका सपना अधूरा रह गया। जब उन्होंने अपने साढ़े चार साल के बेटे वैभव के हाथों में पहली बार प्लास्टिक का बल्ला देखा, तो उन्हें समझ आ गया कि इस बच्चे की टाइमिंग गॉड-गिफ्टेड है।

पिता का संघर्ष : वैभव के पास अभ्यास के लिए कोई आधुनिक एकेडमी नहीं थी। पिता संजीव ने अपने ही खेत के एक हिस्से को समतल किया और वहां मिट्टी की पिच तैयार कर दी। वे खुद सुबह-शाम वैभव को थ्रो-डाउन (गेंद फेंककर अभ्यास कराना) देते थे। बेटे की ट्रेनिंग में कोई कमी न आए, इसके लिए पिता ने कर्ज (लोन) भी लिया और उसे पटना की क्रिकेट एकेडमी भेजा।
अब तक का करियर : रिकॉर्ड्स की झड़ी और IPL 2026 का ‘कोहराम’

वैभव का सफर किसी चमत्कार से कम नहीं है। उन्होंने हर उम्र के क्रिकेट में अपनी उम्र से दोगुने बड़े गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाई हैं:
- 12 साल की उम्र में रणजी डेब्यू: वैभव ने जनवरी 2024 में महज 12 साल 284 दिन की उम्र में बिहार के लिए रणजी ट्रॉफी (फर्स्ट क्लास क्रिकेट) खेलकर पूरी दुनिया को चौंका दिया था।
- इंडिया अंडर-19 में सबसे तेज शतक: ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के खिलाफ चेन्नई में खेलते हुए वैभव ने मात्र 58 गेंदों में ताबड़तोड़ शतक ठोक दिया था, जो अंडर-19 के इतिहास का दूसरा सबसे तेज शतक है।
- IPL 2026 का महा-धमाका: राजस्थान रॉयल्स ने वैभव की प्रतिभा को पहचाना। हाल ही में संपन्न हुए IPL 2026 में वैभव सूर्यवंशी ने दिग्गजों को पानी पिला दिया। उन्होंने 16 मैचों में 776 रन बनाए, जिसमें उनका स्ट्राइक रेट 237.30 का रहा। वे इस सीजन के ‘ऑरेंज कैप’ विनर और मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर (MVP) बने, जिसने उनके लिए टीम इंडिया के रास्ते खोल दिए।
इतिहास के पन्नों में वैभव : 18 साल से कम उम्र में टीम इंडिया में आने वाले दिग्गज
वैभव से पहले भी भारतीय क्रिकेट में कुछ ऐसे ‘वंडर किड्स’ आए हैं जिन्होंने 18 साल की उम्र से पहले सीनियर टीम का हिस्सा बनकर सनसनी मचाई थी। लेकिन वैभव इन सबमें सबसे छोटे हैं:
- वैभव सूर्यवंशी: 15 साल, 71 दिन की उम्र में चयन (साल 2026, आयरलैंड और इंग्लैंड सीरीज के लिए)
- सचिन तेंदुलकर: 16 साल, 205 दिन की उम्र में डेब्यू (साल 1989, बनाम पाकिस्तान)
- पार्थिव पटेल: 17 साल, 152 दिन की उम्र में डेब्यू (साल 2002, बनाम इंग्लैंड)
- हरभजन सिंह: 17 साल, 265 दिन की उम्र में डेब्यू (साल 1998, बनाम ऑस्ट्रेलिया)
अपनों की जुबानी: वैभव की ऐतिहासिक सफलता पर पिता ने क्या कहा
1. भावुक पिता: संजीव सूर्यवंशी (किसान और वैभव के पहले गाइड)
”जब वह साढ़े चार साल का था, तब से मैंने उसकी आंखों में यह सपना देखा था। लोग कहते थे कि बिहार के एक छोटे से गांव से आकर कोई टीम इंडिया में कैसे जा सकता है, लेकिन मुझे अपने बेटे की मेहनत और उसकी टाइमिंग पर पूरा भरोसा था। जब कर्ज लेकर उसे पटना भेजा था, तो रातों को नींद नहीं आती थी, लेकिन आज वैभव ने मेरी जिंदगी की सारी थकान और चिंता एक पल में मिटा दी। यह सिर्फ वैभव की जीत नहीं है, यह हर उस पिता की जीत है जो अपने बच्चे के सपनों के लिए लड़ता है। देश के लिए खेलते देखना ही मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा इनाम होगा।”
क्या भारतीय क्रिकेट को मिल गया है नया युवराज ?
बाएं हाथ के इस बल्लेबाज के खेलने की शैली में युवराज सिंह जैसी नजाकत और सौरव गांगुली जैसी ऑफ-साइड की टाइमिंग नजर आती है। सिलेक्टर्स ने उन्हें आगामी एशियन गेम्स और टी-20 सीरीज के लिए चुनकर साफ कर दिया है कि वे भारतीय क्रिकेट के भविष्य की नींव रख रहे हैं। बिहार से कीर्ति आजाद और एमएस धोनी (तब बिहार) के बाद इस तरह का गॉड-गिफ्टेड टैलेंट निकलना भारतीय डोमेस्टिक क्रिकेट की एक बड़ी जीत है।
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