युवा अधिवक्ता विशाल यादव की धारदार दलीलों के आगे ध्वस्त हुई झूठी कहानी, कोर्ट ने माना, प्रतिशोध में दर्ज कराया गया था मामला
नई पहल न्यूज नेटवर्क। कोरबा। न्याय में देरी हो सकती है, लेकिन सत्य पराजित नहीं हो सकता।” इस कहावत को चरितार्थ करते हुए कोरबा के माननीय न्यायालय ने थाना सिविल लाइंस में दर्ज एक बेहद संवेदनशील पॉक्सो (POCSO) मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आपसी रंजिश के चलते एक व्यक्ति पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों को न्यायालय ने सिरे से खारिज करते हुए आरोपी को सम्मानपूर्वक दोषमुक्त कर दिया है।
प्रतिशोध की पटकथा: चाकूबाजी की FIR का लिया गया बदला
मामले की जड़ें आपसी विवाद में दबी थीं। आरोपी और शिकायतकर्ता महिला पड़ोसी होने के साथ-साथ रिश्तेदार भी थे। विवाद की शुरुआत तब हुई जब महिला और उसकी पुत्री ने आरोपी और उसकी पत्नी पर जानलेवा हमला कर दिया, जिसमें आरोपी के पैर पर चाकू से वार किया गया था।
जब आरोपी ने इस हमले की एफआईआर सिविल लाइंस थाने में दर्ज कराई, तो खुद को कानून के शिकंजे से बचाने और बदला लेने के लिए महिला ने अपनी नाबालिग पुत्री का इस्तेमाल ढाल के रूप में किया और आरोपी पर पॉक्सो एक्ट समेत गंभीर धाराओं में काउंटर केस दर्ज करा दिया।
अधिवक्ता विशाल यादव की ‘विधिक सर्जिकल स्ट्राइक’
इस मुश्किल मामले में बचाव पक्ष की कमान संभाल रहे युवा और प्रखर अधिवक्ता विशाल यादव ने मामले की परत-दर-परत खोलकर रख दी। श्री यादव ने न्यायालय के समक्ष अकाट्य तर्क प्रस्तुत करते हुए सिद्ध किया कि:



- विलंब की साजिश: एफआईआर दर्ज कराने में जानबूझकर देरी की गई ताकि कहानी गढ़ी जा सके।
- साक्ष्यों का अभाव: पुलिस जांच में ऐसी खामियां थीं जो अभियोजन के दावों को खोखला साबित करती थीं।
- बयानों में विरोधाभास: पीड़िता और उसकी माता के बयानों में तालमेल की कमी थी, जो केवल बदले की नीयत की ओर इशारा कर रहे थे।
न्यायालय का बड़ा संदेश: “संदेह के आधार पर सजा नहीं”
माननीय न्यायालय ने समस्त साक्ष्यों का सूक्ष्मता से परीक्षण करने के बाद अधिवक्ता विशाल यादव के तर्कों को स्वीकार किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्याय की कसौटी पर केवल ठोस सबूत टिकते हैं, भावनाएं या बदले की भावना नहीं। अभियोजन पक्ष आरोपी के विरुद्ध आरोपों को ‘संदेह से परे’ साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।
न्याय की जीत और अधिवक्ता की दक्षता
यह फैसला न केवल एक निर्दोष व्यक्ति के सम्मान की वापसी है, बल्कि यह कानून का दुरुपयोग करने वालों के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है। इस प्रकरण में अधिवक्ता विशाल यादव की कानूनी सूझबूझ और ईमानदारी की शहर भर में चर्चा हो रही है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि पैरवी सत्य और तथ्यों के साथ की जाए, तो न्याय की जीत सुनिश्चित है।




