
केशकाल घाटी के 240 गांवों के लोग हर साल भादो जात्रा के दौरान अपने गांव के देवताओं को मंदिर में लाते हैं
संतोष ठाकुर। जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की केशकाल घाटी में स्थित भंगाराम देवी मंदिर में एक विशिष्ट परंपरा है। यहां भक्तों की प्रार्थनाओं का उत्तर न देने वाले देवी-देवताओं पर मुकदमा चलाया जाता है। केशकाल घाटी के 240 गांवों के लोग हर साल भादो जात्रा के दौरान अपने गांव के देवताओं को मंदिर में लाते हैं। मंदिर की अदालत में देवी भक्तों की शिकायतें सुनती हैं। देवताओं पर फसल खराब होने, बीमारी फैलने, आपदाएं आने और बाढ़ जैसी समस्याओं के आरोप लगाए जाते हैं।


इस अनूठी अदालत में जानवर, मुर्गियां और पक्षी गवाह बनते हैं। मंदिर में अपराध, गवाहों और अंतिम निर्णय का रिकॉर्ड रखा जाता है। सुनवाई के बाद देवी का फैसला पुजारी के माध्यम से सुनाया जाता है। दोषी देवताओं को दो तरह की सजा दी जाती है। पहली मृत्यु दंड, जिसमें देवता की मूर्ति तोड़ दी जाती है। दूसरी अस्थायी निष्कासन, जिसमें देवता को कुछ समय के लिए मंदिर से बाहर रखा जाता है। निष्कासित देवताओं को सुधार का मौका दिया जाता है। जब वे गलती सुधारने का वादा करते हैं, तब उन्हें पुनः स्थापित किया जाता है।

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