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एक्सक्लूसिव वीडियो : कोरिया तिहरा हत्याकांड : काम – जिला स्तरीय गौधाम समिति का सदस्य, और कृत्य ऐसा कि इंसान को ही पेट्रोल डालकर जिंदा जला मार दिया !

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भरतपुर-सोनहत विधायक रेणुका सिंह के बेहद करीबी मनोज त्रिपाठी का खौफनाक चेहरा; परिवार ने उतारी थी विधायक की आरती, अन्य आरोपी अब भी फरार

नई पहल न्यूज नेटवर्क। कोरिया। छत्तीसगढ़ के इतिहास में शायद यह पहला ऐसा रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला है, जहां तीन लोगों को एक कार के भीतर पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया। इस जघन्य और कड़े प्रहार वाले तिहरे हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार कोई आम अपराधी नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र के संरक्षण में पल रहा एक रसूखदार चेहरा है। कोरिया जिले के सोनहत ब्लॉक के नगोई में हुए इस नरसंहार में शामिल मुख्य आरोपी मनोज त्रिपाठी को लेकर जो खुलासे हो रहे हैं, वे शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली के साथ-साथ राजनीतिक संरक्षण पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

भारी जनाक्रोश और पुलिसिया दबाव के बाद मुख्य आरोपी मनोज त्रिपाठी अब पुलिस की गिरफ्त में है, लेकिन वारदात में शामिल उसके अन्य मददगार अब भी कानून की पकड़ से दूर हैं।

काम— जिला स्तरीय गौधाम समिति का सदस्य, और कृत्य ऐसा कि इंसान को ही जिंदा जलाकर मार दिया !

कहते हैं कि गायों की सेवा और संरक्षण सबसे नेक कामों में से एक है। इसी नेक काम के लिए राज्य शासन द्वारा जिला स्तर पर जिम्मेदारी सौंपी जाती है। कोरिया जिले की आधिकारिक सरकारी चिट्ठी जो कि कार्यालय उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवायें, बैकुंठपुर द्वारा जारी की गई थी, उसमें साफ तौर पर मनोज त्रिपाठी, नगोई का नाम जिला स्तरीय गौधाम समिति के सदस्य (क्रमांक 12) के रूप में दर्ज है।

सिस्टम का सबसे क्रूर और खौफनाक विरोधाभास देखिए:

  • सौंपी गई जिम्मेदारी: पशुओं को बचाने और गायों की निस्वार्थ सेवा करने का पवित्र दायित्व।
  • किया गया खौफनाक कृत्य: तीन जीती-जागती इंसानी जिंदगियों पर बेरहमी से पेट्रोल छिड़क कर उन्हें तड़पाते हुए जिंदा जला मारना!

​जिस त्रिपाठी को मूक पशुओं की रक्षा के लिए ‘पावर’ और जिम्मेदारी दी गई थी, उसी गौधाम समिति के सदस्य ने इंसान को जिंदा जलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस भयानक कृत्य ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।

विधायक का बेहद करीबी : परिवार ने उतारी थी विधायक की आरती, खुद मनोज भी था मौजूद

​मनोज त्रिपाठी का रसूख सिर्फ इस समिति तक ही सीमित नहीं था, बल्कि वह भरतपुर-सोनहत विधायक और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह का भी बेहद करीबी माना जाता है। सियासी गलियारों में यह चर्चा आम है कि मनोज त्रिपाठी को जिला स्तरीय गौधाम समिति का सदस्य मनोनीत कराए जाने की सिफारिश भी स्वयं विधायक रेणुका सिंह ने ही की थी।

​इस राजनीतिक नजदीकी और रसूख को बयां करता एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में मनोज त्रिपाठी के परिवार के सदस्य विधायक रेणुका सिंह की बकायदा आरती उतारते हुए देखे जा सकते हैं। इस वीडियो में मुख्य आरोपी मनोज त्रिपाठी भी विधायक के बेहद करीब हाथ जोड़े खड़ा दिखाई दे रहा है। इसी राजनीतिक रसूख और वरदहस्त के दम पर आरोपी इलाके में अपनी समानांतर सत्ता चला रहा था।

तीखा सवाल : सलाखों के पीछे जाने के बाद भी समिति से क्यों नहीं हटा नाम ?

​इस पूरी घटना में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इतना बड़ा नरसंहार होने और मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद भी शासन-प्रशासन की पूरी तरह से नींद नहीं खुली है। गौरतलब है कि गौ सेवा को बहुत नेक काम माना जाता है, लेकिन त्रिपाठी जैसे सदस्य ने इंसान को जिंदा जलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके बावजूद, प्रशासनिक शिथिलता या राजनीतिक दबाव के चलते उसका नाम अब भी जिला स्तरीय गौधाम समिति के सदस्य के तौर पर बरकरार है और उसे अब तक पद से नहीं हटाया गया है।

​प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि विभागीय ‘लालफीताशाही’ (कागजी प्रक्रिया में देरी) और राजनीतिक आकाओं के दबाव के कारण ही आरोपी के निष्कासन की फाइल दबी हुई है। कोई भी अधिकारी सीधे तौर पर इस रसूखदार पर हाथ डालने या उसकी सदस्यता रद्द करने का जोखिम उठाने से कतरा रहा है।

कुछ आरोपी तो जेल में, पर बाकी आरोपी अब भी पुलिस की जद से बाहर

​पुलिस ने इस मामले में मुस्तैदी दिखाते हुए मुख्य आरोपी मनोज त्रिपाठी को तो अपनी गिरफ्त में ले लिया है, जिससे इलाके के लोगों ने थोड़ी राहत की सांस ली है। लेकिन इस खौफनाक साजिश को अंजाम देने वाले पूरे घटनाक्रम के अन्य आरोपी अब भी पुलिस की जद से बाहर हैं। बाकी सह-आरोपियों के फरार होने से पीड़ित परिवारों और स्थानीय जनता में अब भी डर और आक्रोश का माहौल है।

​जनता अब सीधे तौर पर शासन और स्थानीय विधायक से यही सवाल पूछ रही है कि नेताओं की आरती उतारने वाले, विधायक की करीबी का धौंस जमाने वाले और गौ सेवा के नाम पर रसूख चमकाकर इंसानों को जिंदा फूंकने वाले इस नरपिशाच को पद से न हटाकर क्या प्रशासन अब भी उसकी बची-खुची साख को बचाने की कोशिश कर रहा है? इसके बाकी मददगारों को कानून कब सलाखों के पीछे पहुंचाएगा?

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