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VSK APP की खामियों और वेतन रोकने के फरमान से शिक्षकों में आक्रोश, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और DPI संचालक को सौंपा ज्ञापन

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2008 सेटअप के आधार पर वाणिज्य संकाय में 2 पद देने, कैशलेस चिकित्सा और पारदर्शी ओपन ट्रांसफर की उठी मांग

जनगणना कार्य के बदले अर्जित अवकाश  देने का भी पुरजोर समर्थन

नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में नया शिक्षा सत्र शुरू हुए अभी महज तीन दिन ही बीते हैं, लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग के अव्यावहारिक दृष्टिकोण और नए-नए कड़े फरमानों ने पूरे प्रदेश के शिक्षकों को मानसिक रूप से परेशान कर दिया है। जहाँ इस समय स्कूलों में पढ़ाई और नए प्रवेश पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए थी, वहीं शिक्षक ऑनलाइन अटेंडेंस के चक्कर में नेटवर्क और सर्वर की समस्याओं से जूझने को मजबूर हैं।

इस गंभीर स्थिति को लेकर ‘छत्तीसगढ़ व्याख्याता वाणिज्य विकास संघ’ के संयोजक एवं प्रदेश अध्यक्ष विष्णु प्रसाद साहू के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के संचालक को अपनी मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि तकनीकी खामियों को सुधारे बिना शिक्षकों का वेतन रोका गया, तो आक्रोश और बढ़ेगा।

मुख्य मांगें और शिक्षकों का दर्द

​संघ के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु प्रसाद साहू ने विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार करते हुए प्रमुख मुद्दों को रेखांकित किया:

​1. VSK APP की तकनीकी खामी और वेतन रोकने का तुगलकी फरमान

“शिक्षक ऑनलाइन अटेंडेंस का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे ऐप की तकनीकी गड़बड़ियों, सर्वर डाउन होने और निजता के हनन से परेशान हैं।”

​सत्र के पहले ही दिन ऐप ने काम करना बंद कर दिया, जिससे सैकड़ों शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी। ऐसे में लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जून माह का वेतन रोकने का निर्देश पूरी तरह अनुचित है। संघ ने मांग की है कि सुदूर ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में नेटवर्क की जमीनी हकीकत देखी जाए। यदि विभाग ऑनलाइन उपस्थिति चाहता है, तो हर स्कूल में आधिकारिक डिवाइस, बायोमैट्रिक मशीन और इंटरनेट की पुख्ता व्यवस्था खुद करे।

2. वाणिज्य संकाय में 2008 के सेटअप को दोबारा लागू करने की मांग

छत्तीसगढ़ में 2008 के सेटअप के अनुसार प्रत्येक विद्यालय में वाणिज्य संकाय के लिए 02 पद स्वीकृत थे। लेकिन 2011-12 के बाद हाई स्कूल से हायर सेकेंडरी में अपग्रेड हुए स्कूलों में केवल 01 पद दिया जा रहा है। पिछले 3-4 वर्षों के बोर्ड परीक्षा परिणामों में वाणिज्य संकाय के 75% छात्र टॉप-10 में जगह बना रहे हैं, फिर भी विभाग इस संकाय की उपेक्षा कर रहा है। संघ की मांग है कि जिन स्कूलों में केवल 1 पद है, वहां तुरंत 2 पद स्वीकृत किए जाएं।

3. बजट में घोषित ‘कैशलेस चिकित्सा’ का अब तक क्रियान्वयन नहीं

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी द्वारा विधानसभा के बजट सत्र में शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा की ऐतिहासिक घोषणा की गई थी। लेकिन धरातल पर अभी तक इसका क्रियान्वयन नहीं हो सका है। इसके अभाव में गंभीर बीमारियों से पीड़ित शिक्षक और उनके परिवार भारी आर्थिक व मानसिक तंगी से गुजर रहे हैं। संघ ने इसे तुरंत लागू करने की मांग की है।

4. पारदर्शी ‘ओपन ट्रांसफर’ की राह देख रहे शिक्षक

​वर्ष 2022 के बाद से प्रदेश में कोई ओपन ट्रांसफर नहीं हुआ है। सालों से अपने घर-परिवार से सैकड़ों किलोमीटर दूर ड्यूटी कर रहे शिक्षक मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं। संघ ने आरोप लगाया कि ऊँची पहुँच वाले लोगों के तबादले तो आसानी से हो रहे हैं, लेकिन आम शिक्षकों के लिए पारदर्शी और निष्पक्ष ओपन ट्रांसफर की नीति तुरंत लागू होनी चाहिए।

5. भीषण गर्मी में किए गए जनगणना कार्य का मिले ‘अर्जित अवकाश’

मई के महीने में भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच शिक्षकों ने राष्ट्रीय महत्व के कार्य (जनगणना) को समय सीमा में पूरा किया है। इस कड़े परिश्रम को देखते हुए शिक्षकों और कर्मचारियों को जनगणना कार्य की अवधि का अर्जित अवकाश प्रदान किया जाए।

ज्ञापन सौंपने के दौरान संघ की मजबूत उपस्थिति

​इस महत्वपूर्ण अवसर पर छत्तीसगढ़ व्याख्याता वाणिज्य विकास संघ के प्रांतीय पदाधिकारियों सहित विभिन्न जिलों के जिला अध्यक्षों और कप्तानों ने अपनी एकजुटता दिखाई।

उपस्थित प्रमुख चेहरे:

ममता वाडदे (प्रदेश उपाध्यक्ष), गीता नायर (प्रदेश सहउपाध्यक्ष), खोमन लाल साहू (प्रदेश संचालक), विवेक धुर्वे (प्रदेश सचिव), जगदीश दिल्लीवार (प्रदेश संरक्षक)।

विभिन्न जिलों के प्रतिनिधि:

अनिता घोरपडे (धमतरी), मधुसूदन सिंह (बीजापुर), लक्ष्मीनारायण साहू (बेमेतरा), शिवशंकर सिंह (बस्तर), भारती साहू (राजनांदगांव), रश्मि पटेल (रायपुर), चंद्रकला साहू (सरगुजा), जी.सी. देवांगन (जांजगीर-चांपा), योगेश्वर दिवान (गरियाबंद), रवि गुप्ता (कवर्धा), संजय देवांगन (अंबागढ़ चौकी), सुधीर दूबे (जशपुर), नवीन साहू, वृत्युंजय भारती (धमतरी), अजय चंद्राकर, श्याम द्विवेदी (महासमुंद), सीबा (बालोद), दीपक (रायगढ़), विनय साहू, उमाशंकर साहू (दंतेवाड़ा), वासु देवांगन (मानपुर-मोहला), अनिल जैन (जगदलपुर), चेतना गुप्ता और प्रतिभा लिमशाकरे (रायपुर) सहित प्रदेशभर से आए वाणिज्य संकाय के सैकड़ों व्याख्याता साथी उपस्थित रहे।

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