
डेस्क। भारत में चाय अब संस्कृति का हिस्सा बन चुकी है। घर में सुबह नींद से जागते ही हम भारतीयों को चाय पीने की आदत सी बन चुकी है। कुछ लोग तो दिन में कई-कई बार चाय पीते हैं तो ज्यादातर लोग दिन में कम से कम दो बार। आप किसी भी शहर या गांव चले जाएं वहां सबसे पहले आपसे चाय ही पूछी जाती है। भारत में अगर आप किसी के घर पहुंचे तो वो आपसे चाय ना पूछे, ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है। अगर ऐसा हो तो लोग कहते हैं- उनके यहां तो चाय भी नहीं पूछा। आप हैदराबाद घूमने जाएं तो वहां की ईरानी चाय, कश्मीर जाएं तो वहां की शीर चाय, नून चाय या गुलाबी चाय जरूर पीएं, ऐसी हिदायतें भारत के अलग-अलग शहरों की यात्रा करने जाने वालों को दी जाती है। चाय पीने का मन ना हो तो कटिंग या कट चाय का चलन भी बहुत बढ़ा है।
हैदराबाद की ईरानी चाय की दुनिया दीवानी
हैदराबाद में हर मोहल्ले में चाय की 50 से ज्यादा स्टॉल मिल जाएंगी। यहां सुबह से लेकर देर रात तक लोग चाय पीते और गप्पे मारते हुए लोग नजर आ जाएंगे। हैदाराबाद में ईरानी चाय का फ्लेवर तो इस शहर के और शहर में घूमने आने वाले लोग लेना भूलते। ईरानी चाय में हल्का खारापन होता है जो इसकी पहचान को खास बनाता है। हैदराबाद में बेक्ड बिस्कुट के साथ ईरानी चाय का लोग भरपूर आनंद लेते हैं।

अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस का इतिहास
अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस यानी इंटरनेशनल टी डे मनाने की शुरुआत 21 मई 2020 से हुई थी। चाय न केवल दुनिया की सबसे पॉपुलर ड्रिंक्स में से एक है बल्कि चाय की खेती कई देशों में आजीविका का मुख्य साधन है। चाय पीने के फायदे और चाय की खपत को बढ़ावा देने के लिए इस दिन को सेलिब्रेट करने की शुरुआत की गई थी।
21 मई के दिन ही क्यों किया जाता है सेलिब्रेट
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि संयुक्त राष्ट्र हर साल 21 मई को इस दिन के तौर पर मनाता है। क्या आप इसके पीछे की वजह के बारे में जानते हैं? दरअसल, ऐसा इसलिए है क्योंकि ज्यादातर देशों में चाय का उत्पादन मई में शुरू होता है। क्या आप जानते हैं कि असम भारत का पहला ऐसा राज्य था जिसने चाय के बागान शुरू किए?


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