नल-जल योजना के नाम पर बंदरबांट का आरोप; 183 गांवों में जल संकट, अधिकारी-नेता सब मौन
मनेन्द्रगढ़। छत्तीसगढ़ के भरतपुर विकासखंड में भीषण गर्मी के बीच जल संकट को लेकर राजनीति गरमा गई है। आम आदमी पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जिला पंचायत सदस्य सुखमंती सिंह ने क्षेत्रीय विधायक रेणुका सिंह और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है और जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है।
भ्रष्टाचार का ‘शोरूम’ बनी पानी की टंकियां
सुखमंती सिंह ने तीखा हमला करते हुए कहा कि भरतपुर विकासखंड के 83 ग्राम पंचायतों (183 गांवों) में नल-जल योजना पूरी तरह विफल है। उन्होंने जमीनी हकीकत बयां करते हुए बताया:

- अधूरा निर्माण: कहीं पाइपलाइन अधूरी है, तो कहीं टोंटी ही गायब है।
- घटिया गुणवत्ता: कई जगहों पर पानी की टंकियां ‘शो-पीस’ बनकर खड़ी हैं, जिनमें दरारें आ चुकी हैं और पानी लीक हो रहा है।
- सांठ-गांठ का खेल: ठेकेदारों ने अधिकारियों के साथ मिलकर काम पूरा किए बिना ही करोड़ों की राशि का बंदरबांट कर लिया है।
- PMGSY: सड़कों के निर्माण में भारी अनियमितता।
- जल संसाधन: नाली निर्माण कार्यों में पैसों की बर्बादी।
- अवैध उत्खनन: क्षेत्र में बेखौफ जारी रेत का अवैध कारोबार।
“सरकार और विधायक की नाक के नीचे खुलेआम लूट मची है। डबल इंजन की सरकार का दावा करने वाले आज जनता को प्यासा छोड़कर गायब हैं।”
— श्रीमती सुखमंती सिंह
‘लापता विधायक’ के तंज से घेरा
विधायक रेणुका सिंह पर सीधा निशाना साधते हुए आप नेत्री ने कहा कि विधायक महोदया क्षेत्र की समस्याओं से पूरी तरह बेखबर हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जनता आपको ‘लापता विधायक’ के नाम से न जाने, इसके लिए जरूरी है कि आप क्षेत्र में आएं और लोगों की समस्याओं का निराकरण करें।
उन्होंने बताया कि पूरे विकासखंड में 10% गांवों में भी योजना सुचारू रूप से संचालित नहीं है, जबकि कागजों में विकास की गंगा बहाई जा रही है।
जनता जनार्दन बनाम सत्ता का संरक्षण
खबर के अनुसार, प्रशासन ने पूरी तरह से आंखें मूंद ली हैं और दोषियों पर कार्रवाई करने से बच रहा है। सत्ता के संरक्षण में ठेकेदार बेखौफ हैं। अब देखना यह है कि ‘चांद भाखर’ से लेकर पूरे प्रदेश में जल संकट पर सरकार कब जागती है या फिर इस भीषण गर्मी में जनता को यूं ही प्यासा छोड़ दिया जाएगा।
क्या क्षेत्रीय विधायक और प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर कोई ठोस कदम उठाएंगे या फिर ‘भ्रष्टाचार की यह टंकी’ यूं ही रिसती रहेगी ?
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