कोरिया में मातृ-शिशु स्वास्थ्य की कमान खुद कलेक्टर ने संभाली, रजिस्टर में गड़बड़ी मिलने पर जमकर लगाई फटकार
नई पहल न्यूज नेटवर्क। कोरिया। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए प्रशासन ने अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना ली है। सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय स्वास्थ्य मिशन की बैठक में तेवर सख्त करते हुए कलेक्टर चन्दन त्रिपाठी ने स्पष्ट कर दिया कि जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले कर्मचारियों की अब खैर नहीं। लापरवाही पाए जाने पर सीधे वेतन रोकने और कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं।
मैदानी अमले से सीधी पूछताछ, परखी जमीनी हकीकत
बैठक में केवल आंकड़ों का खेल नहीं चला, बल्कि कलेक्टर ने ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों, बीपीएम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों और मितानिनों से सीधा संवाद किया। उन्होंने कम वजन वाले नवजात शिशुओं और संस्थागत प्रसव के मामलों पर अधिकारियों को घेरते हुए पूछा कि आखिर पोषण और देखभाल में चूक कहाँ हो रही है?


गर्भवती महिलाओं की जांच में ‘नो कॉम्प्रोमाइज’
कलेक्टर ने निर्देश दिया कि गर्भावस्था के पहले से नौवें महीने तक हर महिला की नियमित जांच अनिवार्य है। इसमें शामिल हैं:
- हीमोग्लोबिन, ब्लड ग्रुप और एचआईवी टेस्ट।
- थायराइड, शुगर, यूरिन और ब्लड प्रेशर की निगरानी।
- आयरन और फोलिक एसिड की गोलियों की नियमित उपलब्धता।
उन्होंने साफ कहा कि जोखिम वाले मामलों की पहचान समय रहते होनी चाहिए ताकि मातृ-शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम किया जा सके।
रजिस्टर चेक किए तो खुली पोल, गिरेगी गाज
निरीक्षण के दौरान जब कलेक्टर ने रिकॉर्ड और रजिस्टरों की जांच की, तो कई स्थानों पर जानकारी अधूरी और गलत पाई गई। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने जिला अस्पताल के एक काउंसलर सहित बीएमओ और बीपीएम को तत्काल नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
रिकॉर्ड संधारण में लापरवाही गंभीर अपराध है। जो कर्मचारी अपने दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं कर रहे, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी उनका वेतन रोकने की कार्रवाई करें।
—चंदन त्रिपाठी, कलेक्टर
जागरूकता बढ़ाने की जिम्मेदारी
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को परिवार नियोजन और पौष्टिक आहार के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करने का जिम्मा सौंपा गया है। बैठक में जिला पंचायत सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह और सिविल सर्जन डॉ. आयुष जायसवाल सहित स्वास्थ्य व महिला बाल विकास विभाग के आला अधिकारी मौजूद रहे। इस सख्त रुख से जिले के स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। प्रशासन का यह कदम कोरिया में बेहतर और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाओं की नींव रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
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