मनेन्द्रगढ़ का ‘मेडिकल पुनर्जागरण’: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने दशकों पुराने संघर्ष को दी ‘विकास की उड़ान’

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नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेन्द्रगढ़|वर्षों की प्रतीक्षा, अनगिनत उम्मीदें और एक लंबा जन-संघर्ष, आज मनेन्द्रगढ़ की माटी का वह सपना साकार होने जा रहा है जिसे कभी नामुमकिन माना जाता था। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और स्थानीय विधायक श्याम बिहारी जायसवाल की इच्छाशक्ति ने मनेन्द्रगढ़ को ‘मेडिकल कॉलेज’ की वो सौगात दी है, जो न केवल इलाज का केंद्र बनेगी, बल्कि इस अंचल की तकदीर और तस्वीर दोनों बदल देगी।

वादों के भँवर से हकीकत की जमीन तक

​मनेन्द्रगढ़ में मेडिकल कॉलेज की मांग कोई नई नहीं है। इसके पीछे संघर्ष की एक लंबी कतार रही है:

  • ​अविभाजित कोरिया का दौर: दशकों से स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए आंदोलन होते रहे। गंभीर मरीजों को बिलासपुर, रायपुर या नागपुर रेफर करना यहाँ की नियति बन चुकी थी।
  • ​हक की लड़ाई: कई बार घोषणाएं हुईं, लेकिन बजट और तकनीकी अड़चनों के नाम पर मनेन्द्रगढ़ का हक पीछे छूटता रहा।
  • ​नया जिला, नई उम्मीद: जिला बनने के बाद बुनियादी ढांचे की दरकार थी। स्वास्थ्य मंत्री ने पद संभालते ही इसे अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा और प्रशासनिक फाइलों को “धूल” से निकालकर “धरातल” पर उतारा।

विकास का ‘मल्टीप्लायर इफेक्ट’: सिर्फ अस्पताल नहीं, आर्थिक इंजन

​चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना केवल मरीजों के लिए राहत नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के लिए एक आर्थिक क्रांति है:

  1. ​शिक्षा का नया हब: अब क्षेत्र के प्रतिभावान बच्चों को डॉक्टर बनने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
  2. ​रोजगार की नई फसल: डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों के साथ-साथ हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार (होटल, ट्रांसपोर्ट, फार्मेसी) सृजित होंगे।
  3. ​स्वास्थ्य क्रांति: जटिल सर्जरी और गंभीर बीमारियों का इलाज अब स्थानीय स्तर पर संभव होगा, जिससे ‘रेफरल सेंटर’ का दंश खत्म होगा।

“जो कहा, वो किया”: संकल्प से सिद्धि का सफर

मनेन्द्रगढ़ की जनता ने मुझ पर जो भरोसा जताया था, यह मेडिकल कॉलेज उसी विश्वास का प्रतिफल है। यह मेरा नहीं, हर उस नागरिक का सपना है जिसने इलाज के अभाव में अपनों को खोया है।

— श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री

भविष्य की तस्वीर: समृद्ध और सशक्त मनेन्द्रगढ़

इस ऐतिहासिक पहल से मनेन्द्रगढ़ की पहचान अब एक पिछड़े इलाके के रूप में नहीं, बल्कि एजुकेशन और हेल्थकेयर हब के रूप में होगी। यह परियोजना शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी और आने वाले दशकों में मनेन्द्रगढ़ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेगी।

दशकों तक मनेन्द्रगढ़ और आसपास के कोयलांचल क्षेत्रों (हसदेव क्षेत्र) की सबसे बड़ी त्रासदी ‘रेफरल सेंटर’ होना थी।

  • ​गंभीर बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में मरीजों को 200 से 400 किलोमीटर दूर बिलासपुर (सिम्स) या नागपुर ले जाना पड़ता था।
  • ​रास्ते में ही दम तोड़ देने वाले मरीजों की कहानियों ने यहाँ एक बड़े अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की मांग को जन्म दिया।

2. जन-आंदोलन और संघर्ष (2000 – 2020)

​मनेन्द्रगढ़ की जनता और स्थानीय संगठनों ने समय-समय पर मेडिकल कॉलेज की मांग को लेकर आवाज उठाई।

  • ​कोरिया जिले के विभाजन से पहले भी यह मांग उठती रही कि इस वनांचल क्षेत्र में एक उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थान होना चाहिए।
  • ​कई बार पदयात्राएं और धरने प्रदर्शन हुए, लेकिन तकनीकी कारणों और बजट की कमी का हवाला देकर इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

3. नया जिला और नई उम्मीद (2022)

​मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) के नए जिले के रूप में गठन के बाद, यहाँ मेडिकल कॉलेज की जरूरत एक अनिवार्य आवश्यकता बन गई। जिला अस्पताल की सुविधाओं को अपग्रेड करने की मांग तेज हुई, ताकि उसे मेडिकल कॉलेज से संबद्ध किया जा सके।

4. निर्णायक मोड़: श्याम बिहारी जायसवाल का कार्यकाल (2023-24)

​इस इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण पन्ना तब लिखा गया जब क्षेत्र के विधायक श्याम बिहारी जायसवाल को प्रदेश का स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया।

  • ​संकल्प की सिद्धि: स्वास्थ्य मंत्री बनते ही उन्होंने मनेन्द्रगढ़ में चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता घोषित किया।
  • ​प्रशासनिक मंजूरी: पूर्व की घोषणाओं को अमली जामा पहनाने के लिए बजट आवंटन और भूमि चयन की प्रक्रिया में तेजी लाई गई।
  • ​कौंसिल ऑफ इंडिया (NMC) के मानक: नेशनल मेडिकल कमीशन के मानकों के अनुरूप अस्पताल के विस्तार और कॉलेज की बिल्डिंग के लिए मास्टर प्लान तैयार किया गया।

5. ऐतिहासिक घोषणा और क्रियान्वयन

​वर्तमान में यह परियोजना अपनी ऐतिहासिक पूर्णता की ओर है:

  • ​भूमि आवंटन: कॉलेज के विशाल परिसर के लिए उपयुक्त भूमि का चिन्हांकन कर लिया गया है।
  • ​बजट का प्रावधान: शासन स्तर पर इसके लिए करोड़ों की राशि स्वीकृत की गई है, जिससे न केवल भव्य इमारत बनेगी, बल्कि अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण भी आएंगे।

इतिहास में दर्ज होने वाले बड़े बदलाव:

  1. ​शैक्षणिक क्रांति: अब कोयलांचल के आदिवासी और ग्रामीण छात्र अपने घर के पास ही MBBS की पढ़ाई कर सकेंगे।
  2. ​सुपर स्पेशलिटी सेवाएं: कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी जैसी सेवाएं, जो यहाँ कभी सपना थीं, अब हकीकत बन रही हैं।
  3. ​अर्थव्यवस्था का कायाकल्प: मेडिकल कॉलेज आने से पूरे मनेन्द्रगढ़ शहर का विस्तार होगा, जिससे व्यापार और रियल एस्टेट को जबरदस्त मजबूती मिलेगी।

मनेन्द्रगढ़ मेडिकल कॉलेज का इतिहास “जनता की मांग” से शुरू होकर “मंत्री के संकल्प” तक पहुँचा है। यह आने वाले समय में सरगुजा संभाग के सबसे बड़े स्वास्थ्य केंद्रों में से एक के रूप में पहचाना जाएगा।

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