सेटअप पुनरीक्षण को मिली मंजूरी: 1000 से अधिक नए पदों के साथ वन विभाग के मैदानी अमले में दौड़ी खुशी की लहर
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर|छत्तीसगढ़ के वन विभाग में पिछले ढाई दशकों से लंबित ‘सेटअप पुनरीक्षण’ की मांग आखिरकार पूरी हो गई है। राज्य सरकार ने वित्तीय बजट 2026 में वन विभाग के मैदानी ढांचे में 1000 से अधिक नए पदों को मंजूरी देकर प्रदेश के वन कर्मचारियों को होली का सबसे बड़ा उपहार दिया है। इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ ने सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है।
25 वर्षों का लंबा संघर्ष और ऐतिहासिक जीत
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद से ही वन विभाग के सेटअप में बदलाव की मांग अधर में लटकी हुई थी। वन कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष अजीत दुबे ने बताया कि संघ पिछले 25 वर्षों से लगातार शासन और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर इस औचित्यपूर्ण मांग के लिए संघर्ष कर रहा था। बजट में इस घोषणा के साथ ही कर्मचारियों का लंबा इंतजार अब खत्म हो गया है।
मुख्यमंत्री और मंत्रियों का जताया आभार
सेटअप पुनरीक्षण की इस मांग को अमलीजामा पहनाने के लिए संघ ने शासन का हृदय से आभार जताया है। प्रांताध्यक्ष ने विशेष रूप से निम्नलिखित नेतृत्व के प्रति कृतज्ञता प्रकट की:
- मुख्यमंत्री: निर्णय लेने के लिए मुख्य आभार।
- केदार कश्यप (वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री): कर्मचारियों की समस्याओं को समझकर सहमति प्रदान करने के लिए।
- ओ.पी. चौधरी (वित्त मंत्री): बजट में पर्याप्त प्रावधान सुनिश्चित करने के लिए।
- प्रशासनिक नेतृत्व: प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री वी. श्रीनिवास राव और अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा द्वारा त्वरित कार्रवाई की सराहना की गई।
फूलों के गुच्छे के साथ धन्यवाद की गूँज
बजट में घोषणा होने के तुरंत बाद आज वन कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने वित्त मंत्री, वन मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट किए। इस दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश कुमार मिश्रा, एच.बी. शास्त्री, संतोष कुमार, सामंत राय, तरुणेंद्र रजक, मनीष कुशवाहा, अहफाज खान, शैलेश गुप्ता, प्रीतम पूराइन, सावन साहू, माधव राजवाड़े, रामकिशुन साहू मुकेश दुबे, मनमोहन दास बारले समेत संघ के तमाम दिग्गज पदाधिकारी और विभिन्न संभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।



“यह केवल पदों की संख्या नहीं, बल्कि उन हजारों कर्मचारियों के समर्पण का सम्मान है जो रात-दिन जंगलों की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। होली से पहले इस सौगात ने कर्मचारियों के उत्साह को दोगुना कर दिया है।”
— अजीत दुबे, प्रांताध्यक्ष, छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ




