नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर|छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दो खाली हो रही सीटों के लिए सियासी पारा चढ़ गया है। विधानसभा के संख्या बल के अनुसार, एक सीट सत्ताधारी भाजपा और एक सीट मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के खाते में जाना तय है। लेकिन इस चुनावी गणित के बीच प्रदेश के सबसे बड़े और प्रभावशाली ‘साहू समाज’ ने दोनों ही दलों के आलाकमान के सामने अपनी सशक्त दावेदारी पेश कर खलबली मचा दी है।
दिल्ली की दहलीज पर प्रतिनिधित्व की जंग
छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ के प्रदेश अध्यक्ष निरेन्द्र साहू के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने आज रायपुर में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव और नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत से मुलाकात कर अपनी मांग रखी। साथ ही, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज से फोन पर चर्चा कर समाज की भावनाओं से अवगत कराया।
समाज का स्पष्ट कहना है कि छत्तीसगढ़ के निर्माण और विकास में अग्रणी भूमिका निभाने के बावजूद आज तक राज्यसभा में साहू समाज की उपेक्षा हुई है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इन दिग्गजों ने संभाली कमान :
समाज की इस महत्वपूर्ण मुहिम में प्रदेश अध्यक्ष श्री निरेन्द्र साहू के साथ निम्नलिखित प्रमुख पदाधिकारी शामिल रहे:



- प्रदीप साहू (प्रदेश संयुक्त सचिव)
- गोपाल साहू
- चुडामंडी साहू
- रोबिन साहू
- देवदत्त साहू
- प्रवीण साहू
- गोपी साहू
- लुकेश साहू
- गुलशन साहू
राजनैतिक मायने: हार-जीत का समीकरण
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 31 विधायकों के वोट की जरूरत है। भाजपा के पास 54 और कांग्रेस के पास 35 विधायक हैं, जिससे दोनों दलों को एक-एक सीट मिलना निश्चित है।
- भाजपा के लिए चुनौती: साहू समाज भाजपा का पारंपरिक और सबसे मजबूत वोट बैंक माना जाता है। समाज की इस मांग को नजरअंदाज करना भाजपा के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
- कांग्रेस के लिए मौका: कांग्रेस यदि किसी साहू चेहरे को राज्यसभा भेजती है, तो वह भाजपा के इस मजबूत वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी कर सकती है।
यह केवल एक पद की मांग नहीं है, बल्कि लाखों साहू बंधुओं के स्वाभिमान और पहचान का सवाल है। जो दल समाज की भावनाओं का सम्मान करेगा, समाज भी आगामी चुनावों में उस दल के प्रति अपनी निष्ठा और सहयोग समर्पित करेगा।
— श्री प्रदीप साहू, प्रदेश संयुक्त सचिव
साहू समाज की इस ‘आर-पार’ की लड़ाई ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को रणनीतिक तौर पर बैकफुट पर ला दिया है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली की राह तय करने के लिए कौन सा दल साहू कार्ड खेलकर सामाजिक न्याय की कसौटी पर खरा उतरता है।




