रिश्तेदारी किनारे, नियम सबसे ऊपर मंत्री श्यामबिहारी ने नपा अध्यक्ष पति को पद से हटाया, कार्यकर्ताओं को सौंपा दायित्व
रविकांत सिंह राजपूत। नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़। छत्तीसगढ़ की सियासत में महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावों के बीच स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने एक ऐसी लकीर खींच दी है, जो पूरे प्रदेश के लिए नजीर बन गई है। मंत्री जायसवाल ने ‘प्रॉक्सी पॉलिटिक्स’ (परदे के पीछे से सत्ता संचालन) के कल्चर को जड़ से खत्म करते हुए मनेंद्रगढ़ नगरपालिका अध्यक्ष प्रतिमा सरजू यादव के पति सरजू यादव को विधायक प्रतिनिधि के पद से तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया है। उनकी जगह अब जमीन से जुड़े कार्यकर्ता महेन्द्र पाल सिंह को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंत्री के इस कड़े फैसले ने साफ कर दिया है कि सुशासन की राह में अपने भी आड़े आए तो नियम नहीं बदलेंगे। आपको बता दे कि मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिला प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल का गृह जिला है। यहां के मनेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र से वह विधायक है। उनके विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में तीन नगरीय निकाय आते है। जिसमे चिरमिरी नगर निगम, मनेंद्रगढ़ नगरपालिका और झगराखांड नगर पंचायत शामिल है।


क्यों जरूरी था यह फैसला? क्या कहता है नियम ?
अक्सर देखा जाता है कि महिला जनप्रतिनिधियों के निर्वाचित होने के बाद उनके पति या पुरुष रिश्तेदार ही ‘अघोषित अध्यक्ष’ बनकर सत्ता चलाते हैं। इसे राजनीतिक भाषा में ‘प्रॉक्सी पॉलिटिक्स’ कहा जाता है।
नियम का आधार : शासन और संगठन का निर्देश है कि महिला नेतृत्व को स्वतंत्र रूप से उभरने दिया जाए। पतियों का ‘प्रतिनिधि’ बनना सत्ता के विकेंद्रीकरण को रोकता है और एक ही परिवार में शक्ति को केंद्रित करता है।



भ्रष्टाचार पर चोट : बिचौलिया संस्कृति को खत्म करने के लिए यह नियम बनाया गया है कि जनप्रतिनिधि का निकटतम रिश्तेदार ‘विधायक प्रतिनिधि’ नहीं हो सकता, ताकि कामकाज में पारदर्शिता रहे।
एमसीबी जिला: सुशासन का ‘रोल मॉडल’
जिले के 6 नगरीय निकायों में अब एक भी ‘प्रॉक्सी प्रतिनिधि’ नहीं है। मंत्री जायसवाल ने जिले में नियमों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया है:
चिरमिरी नगर निगम : महापौर रामनरेश राय के साथ विधायक प्रतिनिधि के रूप में राजकुमार (राजू) नायक सक्रिय हैं।
नगर पंचायत झगराखांड: अध्यक्ष रीमा रमेश यादव हैं, लेकिन कमान विधायक प्रतिनिधि उमेश जायसवाल के हाथ में है।
नगर पंचायत नई लेदरी, खोंगापानी और जनकपुर : यहाँ भी क्रमशः वीरेंद्र सिंह राणा और ललिता रामा यादव, कौशल पटेल के नेतृत्व में नियम सम्मत व्यवस्था संचालित है।

नियमों की कसौटी पर जायसवाल का फैसला
गौरतलब है कि शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के कार्यों में उनके परिजनों का कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। इस नियम की मूल भावना महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने इसी प्रशासनिक शुचिता का पालन करते हुए यह कड़ा कदम उठाया है। जानकारों का कहना है कि यह निर्णय न केवल शासन के आदेशों का सम्मान है, बल्कि उन कार्यकर्ताओं के लिए भी संजीवनी है जो परिवारवाद के कारण उपेक्षित महसूस करते थे।
मंत्री का कड़ा संदेश: नियम सबके लिए बराबर
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ माना जा रहा है। सरजू यादव मंत्री के करीबी माने जाते हैं, बावजूद इसके उन्हें पद से हटाना यह दर्शाता है कि मंत्री जायसवाल अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चल रहे हैं। इस बदलाव से सामान्य कार्यकर्ताओं में उत्साह है कि अब योग्यता और निष्ठा को परिवारवाद से ऊपर तरजीह मिल रही है।
महिला सशक्तिकरण को मिले नए पंख
“महिला सशक्तिकरण केवल कागजों पर नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए। निर्वाचित महिलाएं खुद निर्णय लें और कार्यकर्ता शासन की योजनाओं को जनता तक पहुँचाएं, यही हमारा लक्ष्य है। प्रॉक्सी कल्चर विकास में बाधक है, जिसे हमने जिले में पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
श्यामबिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री




