सोनहत में डॉ. महंत के आगमन से पहले छिड़ी ‘वैचारिक जंग’, क्या रेणुका सिंह की इस पहल को स्वीकारेंगे गुलाब कमरो ?
नई पहल न्यूज नेटवर्क। सोनहत। भरतपुर-सोनहत की विधायक और पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री रेणुका सिंह ने क्षेत्र में जारी सियासी चर्चाओं के बीच ‘नई पहल’ से बातचीत करते हुए एक बड़ा वैचारिक बयान दिया है। सोनहत में आयोजित भव्य शिव महापुराण कथा के बीच नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के आगमन और पूर्व विधायक गुलाब कमरो के सस्पेंस को लेकर रेणुका सिंह ने स्पष्ट किया कि धार्मिक मंचों पर राजनीति की दीवारें ढह जानी चाहिए।
“धर्म का अर्थ कर्तव्य और न्याय”— रेणुका सिंह
‘नई पहल’ में खबर प्रकाशन के बाद उपजी चर्चाओं पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए रेणुका सिंह ने कहा:

धार्मिक आयोजनों में दलगत भावना से ऊपर उठकर काम करने की आवश्यकता है। कुछ लोग कहते हैं कि धर्म और राजनीति अलग होनी चाहिए, लेकिन हमारे सनातन चिंतन में धर्म का अर्थ है—कर्तव्य, न्याय एवं लोक कल्याण। जब राजनीति धर्म से जुड़ती है तो सत्ता ही सेवा बन जाती है।
उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा कि धर्म के मार्ग पर चलकर ही सत्ता से मानव सेवा और मानव सेवा से ईश्वर सेवा संभव है। उनके इस बयान को पूर्व विधायक गुलाब कमरो के लिए एक ‘सौम्य आमंत्रण’ के साथ-साथ ‘वैचारिक चुनौती’ के रूप में भी देखा जा रहा है।
सियासी हलचल: महंत परिवार की दस्तक और गुलाब कमरो का ‘धर्मसंकट’
15 फरवरी को नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत अपनी पत्नी सांसद ज्योत्सना महंत और बेटे सूरज महंत के साथ सोनहत पहुंच रहे हैं। लेकिन असली चर्चा गुलाब कमरो को लेकर है:
- मेंड्रा में साथ, सोनहत में क्या?: गुलाब कमरो ने कार्यकर्ताओं को हसदेव उद्गम (मेंड्रा) पहुंचने को कहा है। वहां तो वे महंत परिवार के साथ रुद्राभिषेक करेंगे, लेकिन सवाल वही है कि क्या वे रेणुका सिंह द्वारा सजाए गए ‘धर्म और कर्तव्य’ के इस मंच पर कदम रखेंगे?
- रेणुका सिंह की गुगली: रेणुका सिंह ने इस आयोजन को ‘ईश्वर सेवा’ बताकर गुलाब कमरो के सामने एक बड़ी लकीर खींच दी है। अब यदि कमरो मंच पर नहीं जाते, तो इसे उनकी राजनीतिक संकीर्णता माना जा सकता है।
मंच पर सजेगा दिग्गजों का गुलदस्ता
इस कथा में मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े और विधायक भैयालाल रजवाड़े की मौजूदगी के बाद अब डॉ. महंत की एंट्री तय है। रेणुका सिंह के इस ताजा बयान के बाद अब पूरे प्रदेश की नजरें ‘नई पहल’ की इस खबर के असर पर टिकी हैं—कि क्या महादेव का यह मंच वाकई दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सत्ता और विपक्ष को एक साथ ला पाएगा?
क्यों खास है यह मोड़ ?
- नया नैरेटिव: रेणुका सिंह ने राजनीति को ‘मानव सेवा’ से जोड़कर विपक्ष के हमलों की धार कुंद करने की कोशिश की है।
- सस्पेंस बरकरार: गुलाब कमरो की मौजूदगी अब इस क्षेत्र की ‘पॉलिटिकल हेडलाइन’ बन चुकी है।
- शक्ति प्रदर्शन: महंत परिवार का पूरा कुनबा साथ आने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में हलचल तेज है।
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