बड़ी कार्रवाई : अंबागढ़ चौकी एकलव्य विद्यालय का होगा पृथक्करण, तैनात होंगे डॉक्टर, काउंसलर और सफाईकर्मी
नई पहल न्यूज नेटवर्क। अंबागढ़ चौकी (मोहला-मानपुर)। छत्तीसगढ़ के अंबागढ़ चौकी स्थित केंद्रीय एकलव्य आवासीय विद्यालय में छात्राओं द्वारा आत्मघाती कदम उठाए जाने की घटनाओं को छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बेहद गंभीरता से लिया है। आयोग की अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग ने दो टूक कहा है कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की प्रताड़ना होने पर धारा 75 (क्रूरता) के तहत सीधे जेल भेजने की कार्यवाही की जाएगी।

6 दिन में 2 सुसाइड प्रयास ने हिलाया प्रशासन
उल्लेखनीय है कि मात्र 6 दिनों के भीतर विद्यालय की दो छात्राओं (10वीं और 11वीं कक्षा) ने आत्महत्या का प्रयास किया था। हालांकि समय पर उपचार मिलने से दोनों सुरक्षित हैं, लेकिन इस घटना ने छात्रावास प्रबंधन और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निरीक्षण में खुली पोल: क्षमता से अधिक बच्चे, स्वच्छता गायब
बाल आयोग की अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा ने 4 फरवरी को खुद स्कूल परिसर का ग्राउंड जीरो पर निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि:
- ओवरलोड हॉस्टल: 500 की क्षमता वाले हॉस्टल में 754 बच्चे ठूंसे गए हैं।
- स्वच्छता का अभाव: क्षमता से अधिक बच्चों के कारण हाइजीन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
- लापरवाही: फिनायल जैसे खतरनाक रसायन बच्चों की आसान पहुंच में पाए गए।
आयोग के कड़े निर्देश: अब ‘शॉर्टकट’ नहीं चलेगा
बैठक के दौरान डॉ. वर्णिका शर्मा ने कलेक्टर को कड़ी अनुशंसा भेजी है, जिसमें निम्नलिखित बड़े बदलाव शामिल हैं:



- हॉस्टलों का पृथक्करण: नए शिक्षा सत्र से मोहला और मानपुर के छात्रावासों को अलग-अलग भवनों में शिफ्ट किया जाएगा।
- विशेषज्ञों की नियुक्ति: रिक्त पदों के विरुद्ध 4 काउंसलर, डॉक्टर और महिला रोग विशेषज्ञ (Gynaecologist) की तत्काल तैनाती।
- सफाई पर फोकस: अतिरिक्त सफाई कर्मियों की भर्ती और परिसर में स्वच्छता सुनिश्चित करना।
- काउंसलिंग: बच्चों के मानसिक तनाव को दूर करने के लिए नियमित संवाद और नैतिक मूल्यों की शिक्षा।
“पढ़ाई ठीक है, लेकिन जान की सुरक्षा सर्वोपरि”
“हमने देखा कि बच्चे पढ़ाई में अच्छे हैं, लेकिन केवल किताबी ज्ञान काफी नहीं है। बच्चों का मानसिक रूप से मजबूत होना और सुरक्षित वातावरण में रहना जरूरी है। वार्डन को अतिरिक्त सतर्कता बरतने और रसायनों को दूर रखने के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही जारी रही तो आयोग कड़ी कानूनी कार्यवाही के लिए बाध्य होगा।”
— डॉ. वर्णिका शर्मा, अध्यक्षा, बाल अधिकार संरक्षण आयोग
प्रशासनिक अमला रहा मौजूद
निरीक्षण और बैठक के दौरान SDM, तहसीलदार, BEO, DSP समेत CWC और बाल संरक्षण विभाग के तमाम बड़े अधिकारी मौजूद रहे। आयोग की इस सक्रियता के बाद अब विद्यालय प्रबंधन में हड़कंप मचा हुआ है।




