नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर/सक्ती। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के अंतिम दौर में प्रदेश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। सक्ती जिले में टोकन जारी होने के बावजूद किसानों से धान नहीं खरीदे जाने के मौखिक आदेश ने ‘अग्निपरीक्षा’ जैसी स्थिति पैदा कर दी है। इस गंभीर मुद्दे पर विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्यपाल को पत्र लिखा है और सरकार की इस नीति को ‘अनैतिक’ करार दिया है।
सड़कों पर उतरा अन्नदाता: मौखिक आदेश से फैला आक्रोश
विज्ञप्ति के अनुसार, सक्ती जिले में प्रशासन द्वारा अचानक दिए गए मौखिक आदेश—जिसमें टोकन में दर्ज मात्रा से कम धान लेने या धान नहीं लेने की बात कही गई है—के बाद किसानों का धैर्य जवाब दे गया है।

- आंदोलन की राह: आक्रोशित किसानों ने कई प्रमुख सड़कों पर आवागमन अवरुद्ध कर चक्काजाम कर दिया है।
- तनावपूर्ण स्थिति: सड़कों पर किसानों के प्रदर्शन से क्षेत्र में स्थिति अत्यधिक संवेदनशील और तनावपूर्ण बनी हुई है।
आंकड़ों की जुबानी: हजारों किसान अब भी कतार में
नेता प्रतिपक्ष ने सक्ती जिले की स्थिति का ब्यौरा देते हुए बताया कि अन्नदाताओं के साथ बड़ा अन्याय हो रहा है:
- पंजीकरण: जिले में कुल 91,526 किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीयन कराया था।
- शेष किसान: 27 जनवरी की दोपहर तक 81,711 किसान ही धान बेच पाए हैं, जिसका अर्थ है कि अभी भी कई हजार किसान अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
- लक्ष्य से दूरी: अनुमानित 5.31 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले अब तक लगभग 4.33 लाख मीट्रिक टन ही खरीदी हो सकी है।
राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग: “तारीख बढ़ाएं, पूरा धान खरीदें”
डॉ. चरणदास महंत ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वे राज्य सरकार को तत्काल निर्देशित करें ताकि:
- धान उपार्जन योजना के तहत किसानों से उनके एक-एक दाने की खरीदी सुनिश्चित की जाए।
- धान खरीदी की अंतिम तारीख (30 जनवरी 2026) को आगे बढ़ाया जाए, ताकि कोई भी किसान वंचित न रहे।
30 जनवरी की डेडलाइन और सरकार की चुनौती
खरीदी खत्म होने में महज 3 दिन शेष हैं और सक्ती जिले का यह उबाल पूरे प्रदेश में फैल सकता है। नेता प्रतिपक्ष का यह पत्र न केवल किसानों की आवाज है, बल्कि सरकार के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है कि यदि अन्नदाता के साथ ‘अन्याय’ हुआ, तो सदन से लेकर सड़क तक लड़ाई और तेज होगी।
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