दादा बिसाहू दास और पिता चरणदास महंत की सियासी थाती को आगे बढ़ा रहे सूरज, मां ज्योत्सना महंत के सारथी बन राजनीति के गुण सीख रहा यह युवा चेहरा
रविकांत सिंह राजपूत। मनेंद्रगढ़। छत्तीसगढ़ की राजनीति में ‘महंत’ एक ऐसा नाम है, जिसका सिक्का दशकों से कायम है। स्व. बिसाहू दास महंत से शुरू हुई यह यात्रा, पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत से होते हुए अब उनकी तीसरी पीढ़ी सूरज महंत तक पहुँच चुकी है। अपनी मां, कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत के साये में रहकर सूरज न केवल चुनावी प्रबंधन सीख रहे हैं, बल्कि जनता के बीच अपनी पैठ भी मजबूत कर रहे हैं।
पर्दे के पीछे से अब ‘फ्रंट फुट’ पर आने की तैयारी ?
सूरज महंत लंबे समय से अपनी मां ज्योत्सना चरणदास महंत के दोनों लोकसभा चुनावों में रणनीतिकार की भूमिका निभाते आए हैं. मां के हर दौरे, सभा और जनसंपर्क में वे साये की तरह साथ रहते है. हाल ही में मीडिया से चर्चा के दौरान जब उनसे भविष्य की राजनीति पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बड़ी परिपक्वता से जवाब दिया, “मैं कांग्रेस का कार्यकर्ता हूँ और जनता की सेवा करना ही मेरा मुख्य लक्ष्य है, चाहे वह किसी भी पद पर रहकर हो”
विरासत और जिम्मेदारी का अनूठा संगम
सूरज महंत के कंधों पर एक भारी विरासत का बोझ भी है और जिम्मेदारी भी:
- दादा स्व. बिसाहू दास महंत: अविभाजित मध्य प्रदेश के कद्दावर नेता और मंत्री。
- पिता चरणदास महंत: पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और वर्तमान में सक्ती विधायक व नेता प्रतिपक्ष。
- मां ज्योत्सना महंत: कोरबा से दूसरी बार की सशक्त सांसद。
इस सियासी रसूख के बीच सूरज खुद को एक जमीनी कार्यकर्ता के रूप में ढाल रहे हैं। वे गाँवों में जाकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं और उनके समाधान के लिए प्रशासन से सीधे संवाद करते हैं。



“अभी तो यह अंगड़ाई है…”— महंत परिवार का बड़ा संकेत
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए अपनी मंशा साफ कर दी थी कि भविष्य की लड़ाई और भी बड़ी होगी. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ज्योत्सना महंत ने कहा कि, “सूरज मेरा बेटा है, वह मेरे साथ काम करता है और जब भी जरूरत होती है, वह मेरा संरक्षण भी करता है” वहीं सूरज ने स्पष्ट किया कि पार्टी जब और जहाँ से उन्हें मौका देगी, वे जनसेवा के लिए तैयार है। सांसद मां ज्योत्सना चरणदास महंत ने कहा कि, पार्टी देगी तो सूरज चुनाव लड़ेगा, इसमें क्या दिक्कत है।
शक्ति या कोरबा: कहाँ से होगी ‘लॉन्चिंग’ ?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या सूरज महंत 2028 के विधानसभा चुनाव में अपने पिता की विरासत सक्ती को संभालेंगे या फिर कोरबा लोकसभा क्षेत्र से अपनी अलग पहचान बनाएंगे? फिलहाल, वे अपनी मां के संसदीय क्षेत्र में सक्रिय रहकर सांगठनिक ढांचे को मजबूत करने में जुटे हैं।




