
जमीन पर नहीं उतरी योजना : विधायक शेषराज हरवंश ने खोली सरकार की नाकामी की फाइल सूखे ट्यूबवेल और सूनी उम्मीदें : हरवंश के सवाल से उठे सिस्टम पर सवाल
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस विधायक शेषराज हरवंश द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न ने सरकार की दो बहुचर्चित योजनाओं की पोल खोल दी। एक ओर जल जीवन मिशन में हजारों ट्यूबवेल सूखे निकले तो दूसरी ओर श्रमिक योजनाओं में पंजीकृत हजारों श्रमिकों को अब तक कोई प्रशिक्षण नहीं मिला।
जल जीवन मिशन: कागज़ों पर जल, ज़मीन पर सूखा

विधायक हरवंश के सवाल पर जवाब देते हुए उप मुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव ने माना कि जल जीवन मिशन के तहत
19313 ट्यूबवेल खनन का प्रावधान था,
पर 3755 ट्यूबवेलों में जल स्रोत ही नहीं मिला — ये पूरी तरह से विफल साबित हुए।
8934 ट्यूबवेलों से जल आपूर्ति शुरू हो चुकी है
5662 ट्यूबवेल खनन अभी बाकी है
अब तक योजना पर ₹9616.57 लाख खर्च किए जा चुके हैं
योजना के लिए ₹24383.95 लाख स्वीकृत हैं
कुल व्यय (योजना की शुरुआत से): ₹1504.57 करोड़
केंद्र से प्राप्त राशि: ₹617.83 करोड़
राज्य सरकार का अंशदान: ₹941.97 करोड़
पामगढ़ के श्रमिकों की हकीकत – 53 हज़ार पंजीकृत, लेकिन एक को भी नहीं मिला प्रशिक्षण
शेषराज हरवंश के दूसरे प्रश्न के जवाब में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने बताया :
पामगढ़ क्षेत्र में 53,220 श्रमिक पंजीकृत
जांजगीर-चांपा जिले में कुल पंजीकृत श्रमिक: 2,07,324
जनवरी 2024 से जून 2025 तक सहायता राशि का वितरण तो हुआ,
लेकिन प्रशिक्षण की स्थिति शून्य रही — एक भी श्रमिक को कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया।
लंबित आवेदनों का निराकरण प्रक्रियाधीन बताया गया।
जनता को सिर्फ उम्मीदें थमाई जा रही हैं” – विधायक हरवंश का तीखा हमला
विधायिका शेषराज हरवंश ने इन जवाबों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, जब लाखों रुपये खर्च कर ट्यूबवेल खुदवाए जाएं और पानी ही न निकले, तो जनता को सिर्फ उम्मीदें दी जा रही हैं, हकीकत नहीं। और जब 53 हजार श्रमिक पंजीकृत होने के बावजूद एक को भी प्रशिक्षण न मिले, तो यह सिद्ध होता है कि योजनाएं सिर्फ कागजों पर चल रही हैं, ज़मीन पर नहीं।
दोहरी नाकामी का खुलासा
1. जल जीवन मिशन में करोड़ों की बर्बादी और विफल ट्यूबवेल
2. श्रमिक कल्याण योजनाओं में भारी पंजीयन, पर शून्य प्रशिक्षण
विधायक शेषराज हरवंश के सवालों ने सरकार की योजनागत घोषणाओं और धरातली हकीकत के बीच की खाई उजागर कर दी है। अब देखना यह होगा कि इन खुलासों के बाद सरकार जवाबदेही निभाती है या यह मुद्दे भी अन्य प्रश्नों की तरह ठंडे बस्ते में चले जाएंगे।


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