15 महीने में 1521 नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता, सुकमा में कलेक्टर अपहरण से जुड़े 23 नक्सली भी शामिल

नई पहल न्यूज। सुकमा। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। जिस नक्सली गिरोह ने कभी कलेक्टर एलेक्स पाल मेनन का अपहरण किया था, आज उसके सदस्य लोकतंत्र की मुख्यधारा में लौट आए। सुकमा में 1.18 करोड़ रुपये के इनामी 23 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें से 8 हार्डकोर कमांडर हैं। आत्मसमर्पण करने वालों में 9 महिलाएं और 14 पुरुष शामिल हैं। इन नक्सलियों की पहचान डीकेएसजेडसी, पीएलजीए और मिलिशिया जैसे सक्रिय संगठनों से जुड़ी रही है।
24 घंटे में 45 नक्सलियों ने छोड़ा हथियार

पिछले 24 घंटे में राज्यभर से कुल 45 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और ‘नियद नेल्ला नार’ जैसी जनोन्मुख योजनाओं में भरोसा जताया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बयान :
“यह सिर्फ आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि विकास और विश्वास की जीत है। अब बस्तर में बंदूक की गोली नहीं, विकास की बोली गूंज रही है।”
मुख्यमंत्री ने बताया कि बीते 15 महीनों में कुल 1521 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। यह राज्य सरकार की ‘नवीन आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025’ की सफलता का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में चल रहे सुशासन और विश्वास की नीतियों को इस सफलता की आधारशिला बताया।
कलेक्टर अपहरण के बाद अब नया मोड़ :
एक दौर था जब नक्सलवाद ने बस्तर को दहशत में रखा था। 2012 में सुकमा कलेक्टर एलेक्सपाल मेनन के अपहरण ने पूरे देश को हिला दिया था। आज उसी घटना से जुड़े नक्सलियों का आत्मसमर्पण यह संकेत देता है कि बस्तर अब डर से, विकास की ओर अग्रसर है।
सुरक्षा बलों की बड़ी भूमिका :
इस ऑपरेशन में जिला पुलिस बल, CRPF, STF और कोबरा बटालियन का विशेष योगदान रहा। यह आत्मसमर्पण केवल रणनीतिक जीत नहीं, बल्कि शांति स्थापना की दिशा में मील का पत्थर है।
पुनर्वास का भरोसा, बदलाव की शुरुआत
नक्सलियों ने माना कि राज्य सरकार की योजनाएं, पुनर्वास की गारंटी और रोजगार के अवसर उन्हें हिंसा छोड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यह आत्मसमर्पण बस्तर की बदलती तस्वीर की एक नई मिसाल है।


About The Author










































