डॉक्टर्स डे स्पेशल : सफेद कोट से जनसेवा तक : जब डॉक्टर बनीं जनता की डॉक्टर

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मरीजों की नब्ज से जनता की नब्ज तक : डॉक्टर अनामिका सिंह की सेवा से सियासत तक की यात्रा

नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। कभी ओपीडी में मरीजों की नब्ज टटोलने वाली रायपुर की गायनोलॉजिस्ट डॉ. अनामिका सिंह आज रायपुर नगर निगम की पार्षद के रूप में जनता की नब्ज टटोलते हुए समस्याओं का इलाज कर रही हैं। वार्ड क्रमांक 49 – रानी दुर्गावती वार्ड से भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज करने वाली डॉ. अनामिका, अब सामान्य प्रशासन विभाग की सभापति के रूप में भी सेवाएं दे रही हैं।

डॉक्टर और नेता – दोनों रोल में अव्वल

रोज सुबह वार्ड का निरीक्षण, सफाई व्यवस्था की मॉनिटरिंग, समस्याओं का निराकरण और जनता से सीधा संवाद — ये उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। उनकी कार्यशैली में डॉक्टर जैसी गंभीरता और पार्षद जैसी संलग्नता स्पष्ट झलकती है। क्लीनिक से शुरू हुआ उनका सफर अब नगर सेवा में बदल गया है। डॉ. अनामिका सिंह ने अपने चिकित्सकीय अनुभव को जनप्रतिनिधित्व में बदलते हुए दिखा दिया कि सेवा की कोई सीमा नहीं होती।

स्वास्थ्य से नगर सेवा की ओर बढ़ाया कदम

पार्षद बनने के बाद भी उन्होंने अपनी चिकित्सकीय संवेदनशीलता नहीं छोड़ी, बल्कि उसे ही नीति और प्रशासन में रूपांतरित कर दिया। रोज सुबह वार्ड का भ्रमण, स्वच्छता पर विशेष ध्यान, और स्थानीय समस्याओं के लिए त्वरित समाधान उनके कार्यशैली का हिस्सा है।

वीरांगना भी, नेतृत्वकर्ता भी

डॉ. सिंह केवल पार्षद नहीं, क्षत्रिय महासभा वीरांगना के चिकित्सा प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। वे नियमित रूप से महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य जागरूकता शिविरों में हिस्सा लेकर स्वास्थ्य और सशक्तिकरण दोनों का संदेश देती हैं।

लोगों की नजर में डॉक्टर साहिबा नहीं, ‘दीदी’ हैं वो

उनके मरीज उन्हें डॉक्टर साहिब, डॉक्टर मैम कहते हैं, लेकिन वार्ड की जनता उन्हें ‘दीदी’, ‘सुनने वाली नेता’, और ‘हमारी डॉक्टर पार्षद’ कहती है। उनके वार्ड के लोग कहते है “जहां अस्पताल में इलाज मिलता था, अब वहीं से हमारे मोहल्ले की सड़क भी सुधरती है, और साफ सफाई भी निरंतर होती है।

“डॉक्टर बनना मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, जीवन का मिशन रहा है। मैंने अस्पताल में मरीजों की तकलीफ़ देखी और समझा, लेकिन जब वार्ड में कदम रखा तो अहसास हुआ कि समाज की बीमारियों का इलाज सिर्फ दवाओं से नहीं, जिम्मेदार शासन से भी होता है। मेरी कोशिश है कि जिस संवेदनशीलता से मैंने एक स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में महिलाओं की चिंता की, उसी भावना से आज वार्ड की हर महिला, बुजुर्ग और बच्चे की समस्याओं को हल कर सकूं। डॉक्टर की पहचान मैंने नहीं छोड़ी, अब मैं सड़कों, नालियों, और जन समस्याओं का इलाज कर रही हूं। ‘स्वस्थ समाज’ के लिए सिर्फ अच्छी चिकित्सा नहीं, साफ-सुथरा और जागरूक वार्ड भी जरूरी है। यही मेरी सुबह की प्रेरणा है और यही मेरा संकल्प।”

डॉक्टर अनामिका सिंह

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