
नई पहल न्यूज नेटवर्क। गरियाबंद/राजिम। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में आस्था को ठेस पहुंचाने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्राम देवरी के एक मंदिर में विराजमान देवी-देवताओं की मूर्तियों पर खून लगाए जाने की घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। धार्मिक श्रद्धा के इस क्रूर अपमान के मामले में राजिम पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना 29 जून की है, जब एक ग्रामीण ने थाना राजिम में शिकायत दर्ज कराई कि गांव के मंदिर में स्थापित मूर्तियों पर खून जैसा पदार्थ लगा हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की और ग्राम देवरी स्कूलपारा निवासी लीला राम साहू (42) और कामता प्रसाद साहू (50) को हिरासत में लेकर सघन पूछताछ की।
अन्धविश्वास के चलते किया यह कृत्य

पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अंधविश्वास के चलते यह कृत्य किया। उनका दावा था कि कहीं से उन्हें यह जानकारी मिली कि देवी-देवताओं को खून का तिलक लगाने से घर में सुख, समृद्धि और धन आता है। इसी भ्रांति में उन्होंने मंदिर की पवित्र मूर्तियों को अपवित्र कर धार्मिक मर्यादा को तार-तार कर दिया।पुलिस ने उनके इस आपराधिक और अंधविश्वासी कृत्य को गंभीरता से लेते हुए उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 298 एवं 3(5) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इसके अतिरिक्त उनके विरुद्ध प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई है।

गिरफ्तार आरोपी
1. लीला राम साहू, पिता श्याम लाल साहू, उम्र 42 वर्ष, ग्राम देवरी स्कूलपारा।
2. कामता प्रसाद साहू, पिता अधारी साहू, उम्र 50 वर्ष, ग्राम देवरी स्कूलपारा।
यह मामला सिर्फ अंधविश्वास का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर हमला है। गरियाबंद पुलिस की तत्परता ने न केवल समाज को विचलित करने वाली घटना पर विराम लगाया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि धर्म और विश्वास के नाम पर किसी भी प्रकार की अशांति या अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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