
रिटायरमेंट से 4 दिन पहले पटवारी की आत्महत्या, ‘मैं निर्दोष हूँ’ लिखकर छोड़ा सुसाइड नोट, भारतमाला घोटाले की FIR के बाद बढ़ा था दबाव !
नई पहल न्यूज नेटवर्क। बिलासपुर । भारतमाला प्रोजेक्ट में भूमि अधिग्रहण घोटाले की जांच के बीच एक सनसनीखेज मोड़ सामने आया है। सकरी थाना क्षेत्र के जोंकी गांव में पटवारी एस.के. मिश्रा ने आत्महत्या कर ली है। बताया जा रहा है कि वे अपनी बहन के फार्महाउस में फांसी के फंदे पर झूलते पाए गए। खास बात यह है कि उनकी सेवानिवृत्ति में मात्र 4 दिन बचे थे।

“मैं निर्दोष हूँ…” – सुसाइड नोट ने खोले कई राज
मौके से मिला सुसाइड नोट इस पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को बढ़ा देता है। सुसाइड नोट में पटवारी एस.के. मिश्रा ने खुद को निर्दोष बताते हुए दो अन्य सरकारी कर्मियों — कोटवार ढेंका और पंचायत सचिव भानु विश्वकर्मा — को इस पूरे मामले का जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में लिखा: “मैं निर्दोष हूँ, लेकिन मुझे फंसाया गया है।”
भारतमाला घोटाले से जुड़ा नाम, FIR के बाद तनाव
महत्वाकांक्षी भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत भूमि अधिग्रहण में गड़बड़ी को लेकर दर्ज FIR में एस.के. मिश्रा का नाम सामने आया था। तोरवा थाना में पूर्व तहसीलदार डी.के. उइके के साथ उनका नामजद उल्लेख किया गया था। पुलिस ने भूमि अधिग्रहण में भारी अनियमितताओं को लेकर भारतमाला घोटाले में एफआईआर दर्ज की थी, जिसके बाद से मिश्रा तनाव में थे।
कहीं व्यवस्था की मार तो नहीं थी मौत की वजह?
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पटवारी मिश्रा पिछले दो दिनों से बेहद तनाव में थे। उन्हें अपने नाम आने से गहरा मानसिक आघात लगा था।
अब यह सवाल उठ रहा है कि—
➡️ क्या किसी निर्दोष कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के पहले अपमान और दबाव ने मौत की ओर धकेल दिया?
➡️ क्या भूमि घोटाले की जांच प्रक्रिया ने बिना पर्याप्त प्रमाण के मानसिक उत्पीड़न का कारण तो नहीं बना?
जांच शुरू, सुसाइड नोट बना अहम सबूत
फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। सुसाइड नोट को बतौर प्राथमिक साक्ष्य लिया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या पटवारी को झूठे आरोपों में फंसाया गया था या मामला कहीं और तक जुड़ा हुआ है।
भारतमाला परियोजना की चमक के पीछे दबी सच्चाई?
भारत सरकार की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना भारतमाला में जिस तरह स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोप और अब एक कर्मचारी की आत्महत्या सामने आई है, उसने इस योजना के प्रभाव, पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यह सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, एक सिस्टम पर सवाल है – क्या भ्रष्टाचार का बोझ किसी ईमानदार को ही ढोना पड़ता है?


About The Author










































