
रविकांत सिंह राजपूत। नई पहल न्यूज नेटवर्क। हास्य और व्यंग्य की दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले छत्तीसगढ़ के गौरव, पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे अब हमारे बीच नहीं रहे। शब्दों की चुटकी में समाज की कड़वी सच्चाई कहने वाले इस अद्भुत कवि ने न केवल मंचों पर, बल्कि देश के जन-जन के दिलों में जगह बनाई।डॉ. दुबे ने हंसी को हथियार बनाया। भ्रष्टाचार, राजनीति, सामाजिक विडंबनाओं पर उन्होंने जो कहा, वह गुदगुदाते हुए सोचने पर मजबूर करता था। उनकी कविताएं सिर्फ मनोरंजन नहीं थीं, वे आईना भी थीं और चाबुक भी। टीवी पर उनकी प्रस्तुतियाँ हों या अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों का मंच — वे जहां भी जाते, वहां एक लहर दौड़ जाती। उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ जैसे – “नेता जी की लात”, “बीवी का दर्द”, “पांच सितारा अस्पताल का मर्ज”, आज भी लोगों के होठों पर मुस्कान ला देती हैं। भारत सरकार ने वर्ष 2010 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाज़ा, जो हास्य-व्यंग्य विधा के लिए एक बड़ी पहचान थी। उनके शब्दों की दवा ने पूरे समाज को हंसने और सच सुनने की ताक़त दी। उनका जाना हास्य कविता की एक बुलंद आवाज़ का मौन हो जाना है। श्रद्धांजलि के शब्दों में नहीं समाएगा वह व्यक्तित्व, जो हर दिल में मुस्कराहट छोड़ गया।
डॉ. सुरेंद्र दुबे आगे भी हर मंच पर गूंजेंगे, हर दिल में मुस्कराते रहेंगे
नई पहल परिवार की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि।



About The Author










































