स्वेच्छानुदान या सत्ता की सुविधा ? डोंगरगढ़ में BJP पदाधिकारियों को मिली आर्थिक मदद पर बवाल। भूपेश बघेल बोले, ‘यह सीधी बंदरबांट है
नई पहल न्यूज़ नेटवर्क। डोंगरगढ़। राज्य सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद एक बार फिर विवादों में है। डोंगरगढ़ क्षेत्र में इस मद से जारी की गई आर्थिक सहायता को लेकर गहरा राजनीतिक बवंडर खड़ा हो गया है। आरोप है कि इस निधि का लाभ उन भाजपा पदाधिकारियों को मिला है, जो न सिर्फ राजनीतिक रूप से प्रभावशाली हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी किसी जरूरतमंद की श्रेणी में नहीं आते। इस मुद्दे को लेकर अब कांग्रेस खुलकर आक्रामक हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे सत्ता पक्ष की “सीधी बंदरबांट” करार देते हुए कहा कि “मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद गरीब, बेसहारा और जरूरतमंदों की सहायता के लिए होती है, न कि भाजपा पदाधिकारियों की सुविधा निधि बनाने के लिए। यह निंदनीय है और सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।”


किसे मिला ‘स्वेच्छा’ का लाभ ?
डोंगरगढ़ में सामने आई सूची में जिन भाजपा पदाधिकारियों को अनुदान राशि मिली है, उनमें शामिल हैं:
भाजपा शहर मंडल महामंत्री विनीत यादव
महामंत्री विनय बंसल
महिला मोर्चा अध्यक्ष सविता दरगढ़
युवा मोर्चा अध्यक्ष सुमीत मिश्रा
मंडल कोषाध्यक्ष भागवत नामदेव
उपाध्यक्ष वत्सला श्रीवास्तव
बूथ अध्यक्ष कमलेश उज्जवने
भाजपा कार्यकर्ता कन्हैया अग्रवाल
ये सभी नाम ऐसे हैं जो संगठनात्मक जिम्मेदारियों में हैं और आमतौर पर सक्षम माने जाते हैं। फिर भी इन्हें उस निधि से लाभ दिया गया जो कि वास्तव में गरीबों और ज़रूरतमंदों के लिए आरक्षित है।

विपक्ष का हमला, सरकार की चुप्पी
विपक्ष इसे सत्तासीन भाजपा द्वारा “जन धन के दुरुपयोग” की खुली मिसाल बता रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब गरीब और जरूरतमंद लोगों के आवेदन महीनों से लंबित हैं, तब राजनीतिक रसूख वाले नेताओं को प्राथमिकता देना भ्रष्टाचार का प्रतीक है। भूपेश बघेल ने खैरागढ़ जिले के ग्राम मूढ़ीपार में आयोजित एक सामाजिक कार्यक्रम में मीडिया से बातचीत के दौरान तीखा हमला बोला और कहा, “यह निधि अब जरूरतमंदों के लिए नहीं, सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं की सुविधा निधि बन गई है।”

सवाल उठते हैं… जवाब कौन देगा ?
क्या भाजपा पदाधिकारी वास्तव में जरूरतमंद हैं?
किन मानकों के आधार पर अनुदान स्वीकृत किया गया?
आम जनता के आवेदन लंबित क्यों हैं, जब रसूखदारों को तुरंत सहायता मिल रही है?
यह मामला मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद की पारदर्शिता, प्रशासनिक निष्पक्षता और लोकधन की नैतिकता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

कांग्रेस का ऐलान, विधानसभा से लेकर सड़क तक होगा संघर्ष
अब कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस मामले को विधानसभा में उठाएगी और जरूरत पड़ी तो राज्यव्यापी आंदोलन भी किया जाएगा। पार्टी का आरोप है कि भाजपा कार्यकर्ता सत्ता के बल पर जनधन का अनुचित लाभ उठा रहे हैं।
सुलगते सवाल
गरीबों की उम्मीदों पर जिस तरह ‘अनुदान’ के नाम पर राजनीतिक सुविधा सवार हो रही है, उससे शासन की संवेदनशीलता पर सवाल उठना लाज़िमी है। जब सत्ता के नज़दीकी लोग सरकारी मदद के प्राथमिक हकदार बन जाएं, तब यह न सिर्फ नैतिक संकट है, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा पर सीधा आघात भी।


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