शाला प्रवेश उत्सव बना ‘विवाद उत्सव’! प्रोटोकॉल टूटने से नाराज हुए विधायक संदीप साहू, मंच से उठकर चले गए, विधायक शेषराज हरबंश ने भी बनाई दूरी

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नई पहल न्यूज़ नेटवर्क। बलौदाबाजार | जिले के कसडोल विकासखंड में आयोजित शाला प्रवेश उत्सव उस वक्त विवादों में घिर गया, जब कार्यक्रम में पहुंचे कसडोल विधायक संदीप साहू मंच पर नाराज़गी जाहिर करते हुए कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर चले गए। विवाद यहीं नहीं रुका — पामगढ़ विधायक शेषराज हरिवंश ने भी कार्यक्रम से दूरी बना ली, जिससे आयोजनकर्ताओं में हड़कंप मच गया।

क्या हुआ कार्यक्रम में ?

कसडोल में विकासखंड स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव का भव्य आयोजन किया गया था, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित अधिकारी व अभिभावक भी शामिल हुए थे। कार्यक्रम में कसडोल विधायक संदीप साहू और पामगढ़ विधायक शेषराज हरिवंश विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित थे। लेकिन जैसे ही मंचीय कार्यक्रम शुरू हुआ, पहले सांसद प्रतिनिधि का सम्मान किया गया और विधायकों को नज़रअंदाज़ कर दिया गया। साहू की नाराजगी का असर तुरंत मंच पर दिखा। उन्होंने माइक उठाया नहीं, कोई भाषण नहीं दिया और सीधे उठकर कार्यक्रम स्थल छोड़ दिया। कुछ ही देर में पामगढ़ विधायक शेषराज हरिवंश ने भी चुपचाप कार्यक्रम से दूरी बना ली।

आयोजक असहज, प्रशासन बैकफुट पर

दोनों विधायकों की नाराजगी से आयोजन समिति और शिक्षा विभाग के अधिकारी असहज हो गए। मौके पर मौजूद अधिकारियों के चेहरों पर घबराहट साफ दिख रही थी। कार्यक्रम की गरिमा एक ओर रह गई और राजनीतिक प्रोटोकॉल का मुद्दा केंद्र में आ गया।

क्यों हुआ विवाद ?

विधायक को मंच पर सबसे पहले सम्मानित नहीं किया गया।

सांसद प्रतिनिधि को पहले बुलाना पड़ा भारी।

प्रोटोकॉल के उल्लंघन से दोनों विधायक नाराज़।

यह स्थिति साफ दर्शाती है कि आयोजनकर्ताओं ने सरकारी प्रोटोकॉल और अतिथियों के स्तर को लेकर गंभीर चूक की।

अब सवाल ये हैं :

1. क्या अधिकारियों को प्रोटोकॉल की जानकारी नहीं थी?

2. क्या यह जानबूझकर किया गया अपमान था या सिर्फ लापरवाही?

3. क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कोई कार्रवाई?

असर और चर्चा

इस घटना के बाद जिले में राजनीतिक गलियारों में चर्चा गर्म है। सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं कि “क्या निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का सम्मान अब दिखावा बनकर रह गया है?” इस तरह की घटनाएं न केवल कार्यक्रम की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच सामंजस्य को भी खतरे में डालती हैं।

मैं क्षेत्र का निर्वाचित विधायक हूं, फिर भी मुझे नजरअंदाज किया गया? यह सरासर प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।” 

संदीप साहू

विधायक

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