नई पहल न्यूज़ नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ में मीडिया की स्वतंत्रता के समर्थन में एक बड़ी जीत सामने आई है। सरकारी अस्पतालों में मीडिया कवरेज पर लगे प्रतिबंध को लेकर मचे भारी बवाल के बाद, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। यह फैसला पत्रकारों की एकजुटता और लोकतंत्र की ताकत का प्रतीक बन गया है।
आदेश जिसने मचा दी थी हलचल

पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक आदेश जारी हुआ, जिसमें प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मीडिया कवरेज पर सख्त पाबंदियां लगा दी गई थीं। फोटो, वीडियो, या मरीजों से संबंधित कोई भी रिपोर्टिंग बिना अनुमति के करना “अवांछनीय” बताया गया। इस आदेश के खिलाफ प्रेस क्लब, पत्रकार संघ और तमाम मीडिया संस्थानों ने जबरदस्त विरोध दर्ज कराया। इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला करार दिया गया।

मंत्री ने माना – मीडिया है लोकतंत्र का आईना
विवाद बढ़ने पर स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने स्वयं मोर्चा संभाला और मीडिया को भरोसा दिलाते हुए कहा :
“मीडिया हमारी आंख, कान और आवाज है। जहां कमियां होती हैं, मीडिया उन्हें उजागर करता है, ताकि हम सुधार कर सकें।
हमारा मकसद कभी भी मीडिया को रोकना नहीं रहा। आदेश को तत्काल निरस्त करने का निर्देश दे दिया गया है।” मंत्री ने यह भी बताया कि स्वास्थ्य सचिव इस समय विदेश दौरे पर हैं, लेकिन उनके लौटते ही विवादित बिंदुओं पर पत्रकारों से चर्चा कर संशोधित आदेश जारी किया जाएगा।
पत्रकारों की एकता बनी ताकत
प्रदेशभर के पत्रकारों ने इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया, धरना प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाई। “प्रेस की आज़ादी से समझौता नहीं” की गूंज हर जिले से उठी, जिसका असर साफ देखने को मिला।
अब क्या होगा आगे ?
मंत्री ने प्रेस क्लब और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ एक औपचारिक बैठक करने की घोषणा की है।
सभी आपत्तिजनक बिंदु पत्रकारों की सहमति से हटाए जाएंगे।
नया आदेश होगा पारदर्शिता और सहमति आधारित।
यह सिर्फ एक आदेश वापसी नहीं, लोकतंत्र की जीत है !
छत्तीसगढ़ में पत्रकारों ने दिखा दिया कि जब मीडिया एकजुट होता है, तो सरकार को भी अपने कदम पीछे खींचने पड़ते हैं।
यह घटनाक्रम न सिर्फ प्रदेश, बल्कि देशभर में स्वतंत्र पत्रकारिता के प्रति विश्वास को और मजबूत करता है।


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