
“शिक्षकों की विधवाओं को लूटा शिक्षा विभाग, मौत के बाद भी नहीं मिली राहत !”
फिंगेश्वर बीईओ कार्यालय में चपरासी के जरिए 4 लाख की रिश्वत, बीईओ और डीईओ चुप्पी साधे रहे

नई पहल न्यूज़ नेटवर्क। गरियाबंद। जिले के फिंगेश्वर शिक्षा खंड से एक मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसमें मृत शिक्षकों की विधवाओं से पेंशन और उपादान राशि दिलाने के नाम पर 4 लाख रुपए की रिश्वत वसूली गई। यह घिनौना काम किसी बाहरी दलाल ने नहीं, बल्कि खुद शिक्षा विभाग के अंदर बैठे लिपिक मजहर खान ने एक स्कूल के चपरासी के जरिए करवाया।
शिकायतें दर्ज, मगर विभाग मौन – कब मिलेगा न्याय ?

शिक्षक गेसराम दीवान और प्रधानपाठक चेनसिंह दीवान की मृत्यु के बाद उनकी पत्नियों विशाखा दीवान और देशो बाई ने बीईओ कार्यालय में पेंशन व उपादान हेतु संपर्क किया। दिसंबर 2024 में ही दोनों से 2-2 लाख रुपए की रिश्वत वसूली गई, जो कि बोरिद स्कूल के चपरासी खोरबहारा ध्रुव के माध्यम से ली गई। पीड़ित विधवाओं के अनुसार, उन्हें धमकाया गया कि अगर पैसा नहीं दिया, तो कोई फाइल आगे नहीं बढ़ेगी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गेसराम दीवान का डीडीओ फिंगेश्वर बीईओ कार्यालय नहीं, फिर भी उनकी विधवा को झांसा देकर लूटा गया।
बेवाओं की चुप्पी टूटी, लिखा आवेदन – फिर भी अफसरों की नींद नहीं टूटी !
10 जून को देशो बाई और 12 जून को विशाखा दीवान ने बीईओ को लिखित शिकायत सौंपी, लेकिन बीईओ रामेंद्र जोशी ने कार्रवाई की जगह चुप्पी ओढ़ ली। आरोपी लिपिक मजहर खान को सिर्फ शाखा बदलकर बचा लिया गया। क्या यही है “गांव-गरीब-गुरुजी” के प्रति सरकारी संवेदना ?

भाजपा नेता ने एसपी को सौंपा ज्ञापन, तब हरकत में आया शिक्षा विभाग
जब विभाग के अफसर निष्क्रिय रहे, तब बीजेपी नेता ने पहल करते हुए एसपी गरियाबंद को ज्ञापन सौंपा और अपराध दर्ज करने की मांग की। इस दबाव के बाद अब जिला शिक्षा अधिकारी ए.के. सारस्वत ने जांच टीम गठित करने की बात कही है।
डीईओ बोले: “अब जांच कराएंगे” | बीईओ बोले: “शाखा बदल दिया, पेंशन अभी प्रक्रियाधीन है”
लेकिन सवाल ये है —
जब रिश्वत दिसंबर में ली गई थी,
जब शिकायतें जून में दर्ज हो चुकी थीं,
जब गवाह भी सामने आ चुके हैं, तो अब तक आरोपी को बर्खास्त क्यों नहीं किया गया? क्या जांच के नाम पर लीपापोती होगी?
➡️ यह मामला सिर्फ रिश्वत का नहीं है, यह एक विधवा की असहायता को हथियार बनाकर शोषण करने की शर्मनाक हरकत है।
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