शिक्षा सत्र के पहले दिन ही व्यवस्था की पोल खुली – स्वागत के फूल नहीं, झाड़ू-फावड़ा मिला बच्चों को
नई पहल न्यूज़ नेटवर्क। महासमुंद। जिले से एक चौंकाने वाली और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है, जिसने प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा सत्र 2025-26 के पहले दिन, जब पूरे प्रदेश में ‘शाला प्रवेशोत्सव’ के माध्यम से बच्चों के स्वागत की तैयारियां की गई थीं, उसी दिन महासमुंद जिले के बागबाहरा ब्लॉक के भिलाईदादर शासकीय प्राथमिक शाला में नौनिहालों को झाड़ू और फावड़ा थमाकर स्कूल परिसर की सफाई कराई गई।


वायरल वीडियो ने खोली हकीकत
करीब 15 सेकंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि स्कूल यूनिफॉर्म पहने छोटे-छोटे बच्चे स्कूल परिसर में झाड़ू लगा रहे हैं, फावड़ा चला रहे हैं और खाने के बर्तनों में कचरा भरकर फेंक रहे हैं। यह दृश्य सिर्फ संवेदनाओं को झकझोरने वाला नहीं, बल्कि ‘शिक्षा के मंदिर’ में बाल अधिकारों की खुली अवहेलना भी है।
स्वागत नहीं, श्रम से शुरुआत
प्रदेशभर के स्कूलों में गर्मी की छुट्टियों के बाद पहले दिन बच्चों के स्वागत हेतु मिठाई, तिलक, रंगोली, और फूलों से सजावट की तस्वीरें सामने आ रही थीं, वहीं इस स्कूल में स्वागत की जगह ‘बाल श्रम’ से शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हुई। किसी भी शिक्षक ने बच्चों को ऐसा कार्य करने से नहीं रोका, जो खुद में एक गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है।
सफाई कर्मचारी हड़ताल पर, बच्चों से कराई जा रही मजदूरी?
प्रदेश में पिछले 15 दिनों से स्कूल सफाई कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। ऐसे में कई स्कूलों में साफ-सफाई का काम नहीं हो पाया है। मगर इस समस्या का समाधान बच्चों से श्रम कराना तो नहीं हो सकता! शिक्षा विभाग ने पहले ही दावा किया था कि “स्कूल खुलने से पहले सभी विद्यालयों में रंग-रोगन, पानी, शौचालय और स्वच्छता की व्यवस्था पूरी कर ली गई है।” परंतु भिलाईदादर प्राथमिक शाला का यह मामला इन दावों की सच्चाई उजागर करता है।
जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा :
“बच्चों से श्रम कराना कानूनी अपराध है। जांच कराई जाएगी और अगर कोई दोषी पाया गया तो उसे नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि यह भी जरूरी है कि बच्चों को छोटी-मोटी साफ-सफाई की शिक्षा मिले, लेकिन उन्हें जबरन श्रम में झोंकना निंदनीय है।”
क्या कहते हैं शिक्षा और बाल अधिकार?
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी प्रकार का बाल श्रम, भले वह प्रतीकात्मक ही क्यों न हो, विद्यालय परिसरों में पूर्णतः प्रतिबंधित है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम भी यह सुनिश्चित करता है कि विद्यालय का वातावरण बाल हितैषी, सुरक्षित और सशक्तिकरण हेतु प्रेरित हो।
अभिभावकों और समाज का आक्रोश
मामला सामने आने के बाद स्थानीय अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। उनका कहना है कि यह घटना सिर्फ स्कूल नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की नाकामी को उजागर करती है। वे मांग कर रहे हैं कि जिम्मेदार शिक्षकों पर तत्काल कार्रवाई की जाए और बच्चों से माफ़ी मांगी जाए।


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