नई पहल न्यूज़ नेटवर्क। रायपुर/धमतरी/बालोद। छत्तीसगढ़ में आज से नए शैक्षणिक सत्र 2025-26 की शुरुआत हो गई। प्रदेशभर के स्कूलों में शाला प्रवेश उत्सव के साथ नन्हें-मुन्नों ने स्कूल का रुख किया, लेकिन राज्य के कई जिलों से ऐसी तस्वीरें भी सामने आईं जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष रूप से धमतरी और बालोद जिले के ग्रामीण अंचलों में पहले ही दिन शिक्षक संकट, मनमानी तबादले और प्रधान पाठक के व्यवहार को लेकर स्कूलों में तालाबंदी कर दी गई।

धमतरी: बोकराबेड़ा में प्रधान पाठक के खिलाफ भड़के ग्रामीण, ताला जड़कर बैठे छात्र

धमतरी जिले के नगरी ब्लॉक के बोकराबेड़ा गांव में शासकीय माध्यमिक शाला का नया सत्र शुरू होने से पहले ही विवाद की भेंट चढ़ गया। ग्रामीणों, अभिभावकों और स्कूली बच्चों ने मिलकर स्कूल के गेट में ताला जड़ दिया और प्रदर्शन पर बैठ गए। मांग यह है कि, प्रधान पाठक को तत्काल हटाया जाए। छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार और अपमानजनक भाषा बंद हो स्कूल में पढ़ाई का स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित किया जाए। छात्रों ने हाथों में तख्तियां लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक नया और जिम्मेदार प्रधान पाठक नियुक्त नहीं होता, वे स्कूल नहीं खुलने देंगे।
बालोद: गिधाली और दारूटोला में शाला प्रवेश उत्सव का बहिष्कार, शिक्षक की मांग को लेकर तालाबंदी
बालोद जिले के डौंडी ब्लॉक में भी शैक्षणिक सत्र का पहला दिन संकटग्रस्त रहा। गिधाली गांव में युक्तियुक्तकरण के तहत प्राथमिक शाला की एकमात्र शिक्षिका का तबादला। विरोध में ग्रामीणों ने बच्चों के साथ स्कूल के बाहर धरना दिया। शाला प्रवेश उत्सव का बहिष्कार किया गया। वहीं दारूटोला गांव में स्कूल में लंबे समय से शिक्षक की कमी। नया सत्र शुरू होते ही गेट में ताला, गुस्साए ग्रामीण धरने पर। शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन हल नहीं निकल पाया।
शाला प्रवेश उत्सव की चमक फीकी
प्रदेशभर में जहां स्कूलों में फूल-मालाओं और स्वागत गान के साथ छात्रों का स्वागत किया गया, वहीं इन ग्रामीण अंचलों में शाला प्रवेश उत्सव सन्नाटे में बदल गया। कई जगह बच्चे स्कूल नहीं पहुंचे, और जो पहुंचे उन्हें बाहर ही बैठकर धरना देना पड़ा।

शिक्षा सुधार पर दोहरी तस्वीर
जहां एक ओर सरकार शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए शाला प्रवेश उत्सव, निःशुल्क पुस्तक वितरण, मध्यान्ह भोजन जैसी योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों की भारी कमी, अनुशासनहीनता और बदइंतजामी जमीनी हकीकत को उजागर कर रही है। नए सत्र की यह शुरुआत सरकार और शिक्षा विभाग के लिए चेतावनी है कि केवल उत्सव नहीं, व्यवस्था में सुधार भी ज़रूरी है।
नए शिक्षा सत्र के शुभारंभ और विरोध को लेकर नई पहल के प्रधान संपादक रविकांत सिंह राजपूत की “त्वरित टिप्पणी” पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।


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