रायगढ़ में मरीन ड्राइव निर्माण को लेकर बवाल, विरोध के बावजूद तोड़फोड़ शुरू, इलाके में तनाव
नई पहल न्यूज़ नेटवर्क। रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में प्रस्तावित मरीन ड्राइव निर्माण को लेकर लंबे समय से विवाद अब पूरी तरह उफान पर पहुंच गया है। भारी विरोध, महिलाओं के प्रदर्शन और पुलिस से झड़पों के बीच शनिवार सुबह नगर निगम ने तोड़फोड़ अभियान की शुरुआत कर दी। इससे क्षेत्र में तनावपूर्ण हालात बन गए हैं। शनिवार सुबह शनि मंदिर से लेकर कयाघाट तक प्रस्तावित मरीन ड्राइव निर्माण कार्य के लिए प्रशासन की टीम बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ पहुंची। पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल स्वयं मौके पर मौजूद रहे। देखते ही देखते पूरा क्षेत्र पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। नगर निगम ने इस निर्माण के लिए पहले ही 295 परिवारों को नोटिस जारी किया था। 12 जून को अंतिम अल्टीमेटम देकर मकान खाली करने का निर्देश दिया गया था। इसके विरोध में शुक्रवार रात स्थानीय मोहल्लेवासियों ने कलेक्टर निवास के बाहर धरना दिया और देर रात तक नारेबाजी करते रहे।


महिलाओं का आक्रोश, कांग्रेस का मोर्चा
तोड़फोड़ अभियान के विरोध में महिला कांग्रेस नेत्रियों और स्थानीय महिलाओं ने मोर्चा संभाला। शनिवार सुबह जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो महिलाओं ने जबरदस्त विरोध किया। पुलिस से धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बनी। कई महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। इसके बाद गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने रायगढ़ के विधायक व छत्तीसगढ़ के वित्तमंत्री ओपी चौधरी के बंगले का घेराव कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने “जनविरोधी नीति बंद करो” और “घर उजाड़ना बंद करो” जैसे नारे लगाते हुए मंत्री के खिलाफ आक्रोश जताया। बंगले के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
पहले दिन 20 मकानों पर चला बुलडोजर
मिली जानकारी के अनुसार, तोड़फोड़ की कार्रवाई के पहले दिन करीब 20 मकानों को गिराया गया है। प्रशासन का कहना है कि यह निर्माण शहर की सुंदरता और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है। लेकिन स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उन्हें न तो वैकल्पिक आवास दिया गया और न ही पर्याप्त समय।
तनावपूर्ण माहौल, आगे की कार्रवाई पर निगाहें
फिलहाल इलाके में भारी तनाव बना हुआ है। पुलिस बल की तैनाती जारी है। स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच टकराव की आशंका को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जबरन उजाड़ी की कार्रवाई जारी रखी तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।


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