राशन कार्ड के बदले रोजगार सहायक की घिनौनी मांग
महिला की शिकायत पर पंचायत में मचा बवाल, एसडीएम ने गठित की जांच समिति

नई पहल न्यूज़ नेटवर्क। केशकाल/कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के केशकाल विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम ईरागांव में एक गरीब महिला के राशन कार्ड आवेदन ने पंचायत तंत्र की नैतिकता और संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। गांव की महिला ने रोजगार सहायक संजय नेगी पर घिनौने आरोप लगाते हुए कहा है कि कार्ड के बदले उसने पहले ‘मुर्गा’ मांगा, और जब महिला ने पैसे देने की बात कही, तो उसने शर्मनाक प्रस्ताव देते हुए कहा – “पैसे नहीं, एक रात चाहिए।”

यह है मामला
पीड़िता के अनुसार, उसने अपने परिवार के लिए नया राशन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया में पंचायत के रोजगार सहायक संजय नेगी से संपर्क किया था। कार्ड तैयार होने के बाद संजय नेगी ने इनाम के रूप में पहले मुर्गा लाने की मांग की। महिला ने जब साफ शब्दों में कहा कि उसके पास मुर्गा नहीं है और वह 500 रुपये देने को तैयार है, तो संजय ने सारी सीमाएं लांघते हुए जवाब दिया – “पैसे नहीं चाहिए, एक रात साथ चाहिए।”
इस बेहूदा प्रस्ताव से घबराई महिला ने तुरंत अपने पति को जानकारी दी, जिसके बाद गांव की ग्राम पंचायत में मामला उठाया गया। पंचायत में हुई बैठक के दौरान सरपंच व पंचों ने इसे गंभीर अनैतिकता बताते हुए रोजगार सहायक के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज किया और कार्रवाई के लिए प्रस्ताव पारित किया।
शिकायत दर्ज और प्रशासन की प्रतिक्रिया
हालांकि घटना 26 मई की बताई जा रही है, महिला ने साहस जुटाकर 9 जून को केशकाल जनपद पंचायत जाकर इस शर्मनाक व्यवहार के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई।
इस पूरे प्रकरण पर केशकाल एसडीएम अंकित चौहान ने मीडिया से बात करते हुए कहा –
“यह अत्यंत गंभीर मामला है। शिकायत के आधार पर जांच समिति गठित कर दी गई है। यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शासन की किसी भी योजना में ऐसी अनैतिक मांग न सिर्फ अस्वीकार्य है, बल्कि यह दंडनीय अपराध भी है।”
पंचायत व्यवस्था पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या ग्राम पंचायतों में पदस्थ कर्मचारी व प्रतिनिधि अपने पद की गरिमा और दायित्व को समझते भी हैं?
सरकारी योजनाओं के जरिये जरूरतमंदों को सहायता पहुंचाने के बजाय यदि उन्हें शोषण, अपमान और शर्मिंदगी का सामना करना पड़े, तो यह व्यवस्था की असफलता मानी जानी चाहिए।

गरीबी का फायदा उठाना अपराध है, और अगर कोई पदाधिकारी ऐसा करता है तो कानून से बख्शा नहीं जाएगा।
पीड़ित महिला ने साहस दिखाकर आवाज उठाई है, यह दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा है कि वे अन्याय के खिलाफ चुप न रहें।
पंचायत व्यवस्था में नैतिकता और पारदर्शिता की सख्त जरूरत है।
शासन-प्रशासन को चाहिए कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई कर सख्त उदाहरण प्रस्तुत करें।


About The Author










































