कलयुगी बेटा : पारिवारिक विवाद में बेटे ने पिता को ईंट से मारा, हुई मौत

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पुलिस ने आरोपी बेटे को किया गिरफ्तार, हत्या का मामला दर्ज

नई पहल न्यूज़ नेटवर्क। दुर्ग। जिले के धमधा थाना क्षेत्र में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां मामूली पारिवारिक विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया। ग्राम राहटादाह में एक बेटे ने अपने ही पिता को ईंट से सिर पर वार कर मौत के घाट उतार दिया। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या का मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश कर दिया गया है।

यह है पूरा मामला
घटना रात की है। राहटादाह निवासी धरमपाल मारकंडे (उम्र लगभग 55 वर्ष) अपने घर पर रात का भोजन कर आराम कर रहे थे। उसी समय उनका बेटा शंकरदास मारकंडे अपनी पत्नी लीला मारकंडे के साथ किसी बात को लेकर झगड़ रहा था। शोरगुल सुनकर धरमपाल ने झगड़ा शांत कराने की कोशिश की। मुसाफिर दास मारकंडे (27 वर्ष), जो मृतक के भतीजे हैं, ने धमधा थाने में दर्ज कराई शिकायत में बताया कि जब उनके बड़े पिता (धरमपाल) ने बेटे को समझाने की कोशिश की तो शंकरदास भड़क उठा और कहने लगा, “तू मुझे समझाने वाला कौन होता है?” इसके बाद उसने गाली-गलौज शुरू कर दी और पास पड़ी ईंट उठाकर सीधे पिता के सिर पर मार दी। ईंट का वार इतनी तेज था कि धरमपाल के बाईं आंख के पास गंभीर चोट आई। घायलावस्था में परिजनों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस की कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलने पर धमधा पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और आरोपी शंकरदास को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में उसने अपने अपराध को स्वीकार कर लिया। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज करते हुए आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

गांव में शोक और हैरानी का माहौल
घटना के बाद गांव में शोक और सन्नाटा है। लोग इस बात से हैरान हैं कि एक बेटा, जो अपने पिता की छाया होता है, उसी ने इतनी क्रूरता से उनकी जान ले ली। मृतक धरमपाल मारकंडे गांव में एक शांत और समझदार व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे।

खबर से सबक :

1. गुस्से और अहंकार में लिया गया फैसला जीवनभर का पछतावा बन सकता है।

2. पारिवारिक विवादों को समय रहते सुलझाना ज़रूरी है, वरना परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं।

3. अभिभावकों की बात मानना और सम्मान देना भारतीय संस्कृति की जड़ है – उसकी अनदेखी विनाश का कारण बन सकती है।

4. कानून किसी को नहीं छोड़ता – चाहे अपराधी खुद परिवार का सदस्य ही क्यों न हो।

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