
रायपुर सिविल लाइन सर्किट हाउस से सैकड़ों टॉवेल, नेपकिन और चादरें गायब, PWD मंत्री अरुण साव ने खुद की सुरक्षा अपील
नई पहल न्यूज़ नेटवर्क। रायपुर। सामान्य ट्रेनों से टॉवेल, नेपकिन गायब होने की घटनाएं तो आम हैं, लेकिन अब यही स्थिति VVIP सर्किट हाउस में भी देखने को मिल रही है। राजधानी रायपुर के सिविल लाइन स्थित सर्किट हाउस जहां मंत्री, सांसद, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी ठहरते हैं, वहां से सैकड़ों टॉवेल, नेपकिन और चादरें गायब हो चुकी हैं। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब PWD मंत्री अरुण साव को खुद सार्वजनिक रूप से अपील करनी पड़ी कि सर्किट हाउस में मौजूद सरकारी सामानों की सुरक्षा करें। वहीं रायपुर के एसडीएम को यह तक कहना पड़ा कि अब से सांसद, विधायक और मंत्रियों के ID कार्ड की जांच की जाए ताकि पता लगाया जा सके कि कौन कब और किस उद्देश्य से ठहरा था।


सिस्टम की लापरवाही या नैतिक गिरावट ?
सवाल उठता है कि क्या ये सिर्फ कर्मचारियों की लापरवाही है या हमारे जनप्रतिनिधियों और अफसरों की नैतिक जिम्मेदारी में गिरावट ? जब माननीयों के रुकने वाली जगह में की संपत्ति सुरक्षित नहीं है, तो यह चिंता का विषय है। प्रदेश के अन्य सर्किट हाउस में भी इसी तरह की शिकायतें है। सरकारी खजाने और सत्ता जिन हाथों में है, उनकी जिम्मेदारी सवालों के घेरे में है।
आखिर कब सुधरेगा यह हाल?
यह घटना न सिर्फ सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है बल्कि आम जनता के उस भरोसे को भी चोट पहुंचाती है, जो वो अपने प्रतिनिधियों पर करती है। जिन लोगों को देश और प्रदेश चलाने की जिम्मेदारी दी गई है, अगर वही सार्वजनिक संपत्ति के प्रति गैर-जिम्मेदार हैं, तो यह संकेत है कि नैतिक मूल्य कमजोर हो चुके हैं।
खबर से सबक
1. नैतिकता और जिम्मेदारी का पतन
जब जनता के प्रतिनिधि, मंत्री, सांसद, विधायक ही सरकारी संपत्ति की सुरक्षा नहीं कर पा रहे, या उसे नजरअंदाज कर रहे हैं, तो यह नैतिक मूल्यों के गिरावट का संकेत है। यह साबित करता है कि ओहदा बड़ा होने का मतलब जिम्मेदारी निभाना नहीं रह गया है।
2. छोटी-छोटी चीजें बड़ा संदेश देती हैं
टॉवेल, नेपकिन और चादरें भले ही मामूली वस्तुएं लगें, लेकिन उनका चोरी होना दर्शाता है कि यदि छोटी चीजों की कद्र नहीं, तो बड़ी जिम्मेदारियों में ईमानदारी की उम्मीद करना भी मुश्किल है।
3. सख्त व्यवस्था की जरूरत
मंत्री, विधायक, सांसद हों या आम आदमी – सभी के लिए नियम एक जैसे हों। ID कार्ड चेकिंग, लॉगबुक और CCTV जैसे अनिवार्य प्रावधान जरूरी हैं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
4. जनता को जागरूक होने की जरूरत
जनता को यह समझना होगा कि प्रतिनिधियों का चुनाव केवल भाषण और प्रचार देखकर नहीं, बल्कि उनके आचरण और जवाबदेही के आधार पर करना चाहिए।
5. शर्म नहीं, सुधार जरूरी है
यह वक्त शर्मिंदगी का नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार का है। यह घटनाएं पूरे सिस्टम के लिए आईना हैं, जिससे सीख लेकर भविष्य बेहतर किया जा सकता है।


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