नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर : छत्तीसगढ़ में दीवाली और राज्योत्सव की चमक के बीच एक ऐसी सनसनीखेज प्रशासनिक हकीकत सामने आई है जिसने राज्य की राजनीति और श्रम जगत में भूचाल ला दिया है। छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं संजारी बालोद की विधायक संगीता सिन्हा ने राज्योत्सव के मंच से जिस प्रशासनिक कूरता और मौखिक छंटनी का अंदेशा जताया था, वह अब लोक निर्माण विभाग के लिखित आंकड़ों के रूप में पूरी तरह सच साबित हो चुका है। त्योहारों के इस पावन मौसम में जब पूरा प्रदेश खुशियां मना रहा है, वहीं दुर्ग परिक्षेत्र के अंतर्गत सैकड़ों श्रमिकों के परिवारों पर रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

विभागवार आंकड़ों का सच : कितने श्रमिकों पर गिरी गाज?
लोक निर्माण विभाग (दुर्ग परिक्षेत्र) के अंतर्गत जारी आधिकारिक और लिखित विवरण ने सरकार के दावों की कलई खोल दी है। 01 अक्टूबर 2026 की स्थिति में जहां कुल 971 श्रमिक अपनी सेवाएं दे रहे थे, वहीं 29 अक्टूबर 2026 तक इनमें से 202 श्रमिकों की भारी-भरकम कटौती का प्रस्ताव सामने आ गया है:
- दुर्ग : 01.10.2026 को कुल 446 श्रमिक थे, जिसमें 107 श्रमिकों की कटौती प्रस्तावित है। कटौती के बाद संशोधित संख्या 339 बची है।
- बालोद : 01.10.2026 को कुल 95 श्रमिक थे, जिसमें 13 श्रमिकों की कटौती प्रस्तावित है। कटौती के बाद संशोधित संख्या 82 बची है।
- बेमेतरा : 01.10.2026 को कुल 172 श्रमिक थे, जिसमें 44 श्रमिकों की कटौती प्रस्तावित है। कटौती के बाद संशोधित संख्या 128 बची है।
- राजनांदगांव : 01.10.2026 को कुल 116 श्रमिक थे, जिसमें 22 श्रमिकों की कटौती प्रस्तावित है। कटौती के बाद संशोधित संख्या 94 बची है।
- मोहला-मानपुर-चौकी : 01.10.2026 को कुल 27 श्रमिक थे, जिसमें 0 श्रमिकों की कटौती हुई। संशोधित संख्या 27 ही है।
- खैरागढ़ : 01.10.2026 को कुल 50 श्रमिक थे, जिसमें 0 श्रमिकों की कटौती हुई। संशोधित संख्या 50 ही है।
- कवर्धा 01.10.2026 को कुल 65 श्रमिक थे, जिसमें 16 श्रमिकों की कटौती प्रस्तावित है। कटौती के बाद संशोधित संख्या 49 बची है।
कुल (दुर्ग परिक्षेत्र): 01.10.2026 को कुल 971 श्रमिक कार्यरत थे, जिसमें 202 श्रमिकों की कटौती के बाद अब संशोधित संख्या 769 हो गई है।

“दीपावली पर निवाले पर डाका डालना बेहद अन्यायपूर्ण और अमानवीय” – संगीता सिन्हा
राज्योत्सव के मंच से हुंकार भरते हुए विधायक संगीता सिन्हा ने बेहद कड़े शब्दों में जो बातें कही थीं, आज विभागीय आंकड़ों ने उन पर पूर्ण विराम लगा दिया है। उन्होंने कहा था—
”दीवाली और राज्योत्सव जैसे पावन पर्व पर हमारे युवाओं का रोजगार छीनना सीधे उनके परिवार के निवाले पर डाका डालने जैसा है। राज्य स्थापना दिवस का यह अवसर खुशी का पर्व है, ऐसे में हमारे युवा साथियों को बेरोजगार मत करो। स्थापना दिवस पर किसी की आंख में आंसू न आएं, यही हमारी मुख्य मांग है। वर्ष 2021 से काम कर रहे कर्मचारियों को हटाने का यह फैसला अत्यंत चिंताजनक और अन्यायपूर्ण है।”
संगीता सिन्हा ने कहा कि पहले जो बात केवल मौखिक चेतावनियों तक सीमित लग रही थी, अब PWD विभाग द्वारा 202 श्रमिकों की छंटनी के लिखित प्रस्ताव के बाद पूरी तरह सच साबित हो चुकी है। इस तानाशाहीपूर्ण और अन्यायपूर्ण आदेश के चलते प्रभावित कर्मचारियों और उनके परिवारों में भारी रोष और असुरक्षा का माहौल व्याप्त है। कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर इन कर्मचारियों की रोजी-रोटी और भविष्य को सुरक्षित करने की पुरजोर मांग की है।
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