पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने उठाए गंभीर सवाल; कहा—”एक पंचायत में यह हाल है, तो पूरे जिले की वोटर लिस्ट की हो निष्पक्ष जांच”
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2026 के तहत प्रकाशित मतदाता सूची की शुद्धता पर एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने निर्वाचन विभाग के दावों और कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी है। ग्राम केल्हारी के निवासी दीपू (पिता सजनलाल) का नाम मतदाता सूची में सुधारने की बजाय पूरी तरह बदलकर ‘तुर्राटोला’ दर्ज कर दिया गया है। किसी जीवित व्यक्ति के नाम की जगह गांव या टोले का नाम दर्ज हो जाना कोई मामूली टाइपिंग मिस्टेक नहीं, बल्कि मतदाता की पहचान को सीधे तौर पर मिटाने जैसी गंभीर लापरवाही है।
इस अजूबे कारनामे के सामने आते ही भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर चुनाव आयोग और जिम्मेदार अधिकारियों की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

बिना सत्यापन के प्रकाशित हुई सूची ? गुलाब कमरो ने दागे तीखे सवाल
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए निर्वाचन विभाग से पूछा कि आखिर किस लापरवाही के तहत यह डेटा एंट्री और प्रकाशन हुआ?
- पहचान पर संकट: जब मतदाता का नाम ‘दीपू’ है, तो वह ‘तुर्राटोला’ के नाम से अपनी पहचान साबित कर मतदान कैसे कर पाएगा?
- जिम्मेदारी किसकी?: ऐसी गंभीर त्रुटि की सीधी जवाबदेही किस अधिकारी या कर्मचारी की तय की जाएगी?
- राहुल गांधी की आशंकाओं पर मुहर: गुलाब कमरो ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार मतदाता सूची की गड़बड़ियों और निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं—यह मामला उन आशंकाओं को पूरी तरह सच साबित करता है।
पूरे जिले में जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
गुलाब कमरो ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब एक अकेली पंचायत में मतदाता सूची का यह आलम है, तो पूरे जिले में न जाने कितने वास्तविक मतदाताओं के नाम गायब या बदले गए होंगे। उन्होंने मांग की है कि:
- संपूर्ण जिले की मतदाता सूची का तत्काल निष्पक्ष री-ऑडिट/जांच कराया जाए।
- पीड़िता दीपू के नाम में तुरुंत सुधार कर सही मतदाता पहचान पत्र जारी किया जाए।
- लापरवाही बरतने वाले डेटा एंट्री ऑपरेटर और संबंधित बीएलओ (BLO)/अधिकारियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई हो।
लोकतंत्र के सबसे बड़े अधिकार पर उठते सवाल
जब लोकतंत्र की बुनियाद यानी ‘वोट देने के अधिकार’ की पहली सीढ़ी (वोटर लिस्ट) में ही ऐसी हास्यास्पद और गंभीर त्रुटियां सामने आएंगी, तो आम नागरिक का भरोसा किस पर रहेगा? अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और निर्वाचन विभाग अपनी भूल सुधारते हुए दोषियों पर क्या कार्रवाई करता है।
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