धान खरीदी से पहले छत्तीसगढ़ में उबाल : “सिस्टम फेल है या किसानों का इम्तिहान ?” — आप ने सरकार को दिया 4 सूत्रीय अल्टीमेटम !

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“फसल खेत में तैयार है, और अन्नदाता दफ्तरों के चक्कर काट रहा है… आखिर सरकार चाहती क्या है?” — सुखमंती सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष, आम आदमी पार्टी

एमसीबी जिले में अन्नदाता का दर्द और सियासी घमासान

नई पहल न्यूज नेटवर्क। भरतपुर / छत्तीसगढ़ सरकार भले ही 15 नवंबर 2026 से धान खरीदी शुरू करने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन धरातल की हकीकत इन दावों के बिल्कुल उलट है। भरतपुर-सोनहत समेत पूरे एमसीबी (मनाेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) जिले में सरकारी तंत्र की नाकामी के चलते किसान एक बार फिर ठगा हुआ महसूस कर रहा है। पंजीयन में पेचीदगियां, गिरदावरी का अधूरा काम, सर्वर डाउन और बायोमेट्रिक की तकनीकी मार ने किसानों की नींद उड़ा दी है।

इसी जन-आक्रोश को मुखर करते हुए आम आदमी पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जिला पंचायत सदस्य सुखमंती सिंह ने 2 नवंबर को भरतपुर एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर राज्य सरकार और कृषि मंत्री को सीधी चेतावनी दी है। ‘आप’ ने साफ कर दिया है कि अगर किसानों के हक पर डाका डालना बंद नहीं हुआ, तो पार्टी पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।

सरकार के खिलाफ ‘आप’ के 4 कड़े अल्टीमेटम

आम आदमी पार्टी ने प्रेस विज्ञप्ति और ज्ञापन के माध्यम से सरकार के सामने निम्नलिखित चार प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • 1. किसान को ठगना बंद करो, 3358 रुपये प्रति क्विंटल दें: केंद्र सरकार द्वारा MSP में 258 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जबकि राज्य सरकार 3100 रुपये देने की बात कहती है। इन दोनों को जोड़कर 3358 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किसानों को क्यों नहीं किया जा रहा? किसान का हक मारना अब और बर्दाश्त नहीं होगा।
  • 2. राजीव गांधी न्याय योजना का 150 रुपये बकाया तुरंत जारी हो: किसानों के हक का 150 रुपये प्रति क्विंटल का बकाया आज तक क्यों रोका गया है? यह जनता का पैसा है, सरकार की तिजोरी का नहीं, इसे तत्काल किसानों के खातों में ट्रांसफर किया जाए।
  • 3. ऐप के जरिए रकबा काटने का खेल तुरंत बंद हो: पटवारी के फर्जी हस्ताक्षर और बिना सहमति के रकबा संशोधन व समर्पण कराया जा रहा है। पिछले साल इसी प्रताड़ना के चलते कई किसानों ने आत्महत्या तक की कोशिश की थी। यदि इस वर्ष ऐसी कोई अनहोनी होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
  • 4. बायोमेट्रिक की नौटंकी और सर्वर फेल का संकट खत्म हो: खेत जोतते-जोतते बुजुर्ग किसानों के अंगूठे घिस चुके हैं, और फिंगरप्रिंट मशीनें उन्हें स्कैन नहीं कर पा रहीं। सर्वर डाउन और नेटवर्क गायब होने की सजा किसान भुगते, यह तानाशाही नहीं चलेगी। इसके लिए पुरानी और सुगम व्यवस्था बहाल की जाए।

अन्नदाता का अपमान अब बर्दाश्त नहीं: सुखमंती सिंह

एसडीएम कार्यालय के बाहर हुंकार भरते हुए सुखमंती सिंह ने कड़े शब्दों में कहा, “जब किसान को अपनी फसल को सहेजने और बेचने की तैयारी करनी चाहिए, तब उसे सरकारी दफ्तरों के चक्कर कटवाकर प्रताड़ित किया जा रहा है। यह सीधे तौर पर अन्नदाता का अपमान है।”

उन्होंने दो टूक कहा कि यदि समय रहते इन जायज मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो आम आदमी पार्टी किसानों के कंधे से कंधا मिलाकर सड़कों पर उतरेगी और ऐसा उग्र आंदोलन होगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी इस ‘निकम्मी व्यवस्था’ की होगी।

प्रदर्शन के दौरान प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:

इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान आम आदमी पार्टी के प्रमुख पदाधिकारी और सैकड़ों किसान मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से:

  • रमाशंकर मिश्रा (कोरबा लोकसभा अध्यक्ष)
  • यू मनमोहन सांधे (जिला मीडिया प्रभारी)
  • रज्जू सिंह व राज कुमार अहिरवार (ब्लॉक अध्यक्ष)
  • रामसुजान मिश्रा (जिला उपाध्यक्ष)
  • समर बहादुर सिंह (ब्लॉक अध्यक्ष)
  • विजय सिंह (जिला अध्यक्ष, एससी विंग)
  • साथ ही सुमेर सिंह, केशव सेन, राजपाल अगरिया समेत भारी संख्या में स्थानीय किसान और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

अब देखना यह होगा कि आम आदमी पार्टी की इस हुंकार के बाद सरकार नींद से जागती है या फिर अन्नदाता के सब्र का इम्तिहान यूं ही जारी रखती है?

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