एक तरफ प्रदेश में जश्न, तो दूसरी तरफ राज्यभर के 5 से 6 हजार संविदा व दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के घरों में पसरा मातम; अकेले बालोद जिले में 55 से ज्यादा नौकरियां खतरे में
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर/बालोद: छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस यानी राज्योत्सव के रंगारंग जश्न के बीच एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने प्रदेश की राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है। महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक संगीता सिन्हा ने राज्योत्सव के मंच से ही सरकार के खिलाफ तीखा मोर्चा खोलते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) के दैनिक वेतनभोगियों की अचानक की गई छंटनी पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने राज्य स्तर पर आंकड़े रखते हुए चेतावनी दी है कि यदि छंटनी का यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो यह लड़ाई विधानसभा से लेकर सड़क तक लड़ी जाएगी।
- प्रदेशभर में हजारों युवाओं पर बेरोजगारी की गाज: विधायक संगीता सिन्हा ने राज्य स्तर पर बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ भर में पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग के 5,000 से 6,000 युवा दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मचारी अचानक रोजगार विहीन हो गए हैं।
- बालोद जिले का हाल: अकेले बालोद जिले में ही 55 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है, जिनके परिवारों की आजीविका सीधे तौर पर खतरे में पड़ गई है।
- मौखिक आदेशों पर हो रही है छंटनी: प्रभावित कर्मचारियों और दस्तावेजों के मुताबिक, वर्ष 2021 या उससे पहले से निरंतर सेवा दे रहे इन मेहनतकशों को 1 नवंबर (राज्य स्थापना दिवस) से बिना किसी पूर्व लिखित नोटिस या पत्र के केवल मौखिक आदेश के आधार पर काम से बैठा दिया गया है।
- चुनावी वादों पर तीखा तंज: सरकार पर कटाक्ष करते हुए विधायक ने कहा कि चुनाव के वक्त ‘मोदी की गारंटी’ के नाम पर दैनिक वेतनभोगियों को नियमित करने का वादा किया गया था, लेकिन पक्का करना तो दूर, राज्योत्सव के पावन पर्व पर मजदूरों के घरों के चूल्हे बुझाने का काम किया जा रहा है।
श्रम कानूनों और प्राकृतिक न्याय का खुला उल्लंघन
कर्मचारियों द्वारा दिए गए ज्ञापन और दस्तावेजों में यह बात खुलकर सामने आई है कि बिना किसी लिखित सूचना के इस तरह रातों-रात सेवाएं समाप्त करना औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 25F एवं अन्य श्रम कानूनों के प्रावधानों के साथ-साथ प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का भी सरासर उल्लंघन है।

मंच से कड़े तेवर दिखाते हुए महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने दो टूक कहा कि जब पड़ोसी राज्यों में कर्मचारियों को स्थायी करने की दिशा में चरणबद्ध कार्य हो रहे हैं, तब छत्तीसगढ़ के युवाओं का यह हश्र क्यों किया जा रहा है? बहरहाल, राज्योत्सव के मंच से उठी इस गूंज ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है और अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन बेरोजगार हुए हजारों श्रमिकों के भविष्य को लेकर क्या कदम उठाती है।
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