
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी की आज पांचवीं पुण्यतिथि हैं। एक कुशल राजनेता से पहले वे प्रशासनिक अधिकारी भी रहे। बोलने की कला ऐसी कि एक पल में लोगों का मन मोह लें। उनके मुंह से धारा प्रवाह निकलती हिन्दी हो, छत्तीसगढ़ी हो या फिर अंग्रेजी ये कहना गलत नहीं होगा कि इतनी जादुई शैली प्रदेश में किसी राजनेता की नहीं है। कभी सिगरेट के पैकेट पर लिखकर कई एकड़ जमीन आवंटित करने वाले स्व. अजीत जोगी की प्रतिमा आज 2 गज जमीन के लिए तरस रही है। यहां तक कि उनके पुत्र अमित जोगी को प्रतिमा लगवाने के लिए धरने पर बैठना पड़ रहा है।

आम जनता के बीच खासे लोकप्रिय राजनेता अजीत जोगी एक सफल प्रशासनिक अधिकारी भी रहे हैं। वे त्वरित फैसला लेने के लिए जाने जाते रहे हैं. वैसे तो उनके सियासी कई घटनाओं और किस्सों के बारे में हम जानते हैं। लेकिन हम उनके एक ऐसे वाकये के बारे में बता रहे हैं जिसके बारे में बहुत कम लोगों को पता होगा. इस घटना का जिक्र उनकी पत्नी रेणु जोगी ने अपनी किताब में भी किया है। ये साल 1978 की बात है, जब अजीत जोगी अविभाजित मध्यप्रदेश में शहडोल जिले के कलेक्टर हुआ करते थे. एक बार एक काम से अजीत जोगी अमरकंटक के दौरे पर थे। वहां पहुंचने पर पता चला कि एक साधु हिमालय से आया हुआ है और एक पेड़ के नीचे कठोर तप कर रहा है।बऔर कुछ भी हो जाए वो वहां से नहीं हट सकता। अजीत जोगी ने भी ये बात सुनी और उस पर ज्यादा ध्यान न देते हुए आसपास के इलाके के दौरे पर निकल गए। जब वे शाम को वापस लौट रहे थे तो बारिश शुरू हो गई देखते ही देखते इस जंगली इलाके में रात गहराने लगी और बारिश भी तेज होने लगी। इतनी कि रास्ता भी दिखाई नहीं दे रहा था, इसी बीच अजीत जोगी ने पेड़ के नीचे कार रोक दी।


जोगी को याद आया कि सुबह लोग एक साधु के बारे में बात कर रहे थे उनके मन में कौतूहल हुआ कि इस बारिश और ठंड में क्या वो साधु तपस्या कर रहा होगा या वहां से उठ गया होगा. अपने साथियों से चर्चा के बाद उन्होंने उस जगह पर जाकर इसकी पुष्टि करने की ठानी. जोगी जब वहां पहुंचे तो पाया कि साधु उसी स्थान में तप में लीन है. उस वक्त जोगी वहां से रेस्टहाउस लौट आए, लेकिन अगले दिन सुबह वे उस स्थान पर फिर पहुंचे, उन्होंने साधु को अपना परिचय बताते हुए इस कठोर तपस्या की वजह और कहां से आए हैं ये जानना चाहा।
साधु ने अपने बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वो यहां एक आश्रम बनाना चाहते हैं, अजीत जोगी ने उसी वक्त जेब में सिगरेट की डिब्बी के भीतर लगे चमकीले रैपर पर आश्रम के लिए जमीन आवंटन कर दी और खुद कदम से चल कर जमीन की नपाई भी कर दी. साथ ही उन्होंने साधु से इस आश्रम में आदिवासी बच्चों को भी रखने का वादा ले लिया.


बाद में ये जगह कल्याण आश्रम के रूप में प्रसिद्ध हुई. ये स्थान आज अमरकंटक के प्रमुख आकर्षण में से एक है. यहां रह कर कई आदिवासी बच्चे शिक्षा ग्रहण करते इस तरह अजीत जोगी त्वरित फैसला करते रहे हैं. छत्तीसगढ़ की सियासत में अजीत जोगी हमेशा एक बेहद महत्वपूर्ण किरदार रहे है। आज उनकी पांचवी पुण्यतिथि पर नई पहल उन्हें श्रद्धाजंलि अर्पित करता है।

About The Author










































