स्क्रीन की आभासी दुनिया से परे, प्रकृति और हौसलों की 21 कहानियों का जीवंत दस्तावेज़ है यह किताब
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। साहित्यिक सृजन और पर्यावरण चेतना की दिशा में आज एक बड़ा कदम उठाया गया। राजभवन (लोक भवन) में आयोजित एक सादे किंतु गरिमामयी समारोह में राज्यपाल रमेन डेका ने लेखिका पूजा अग्रवाल की नई पुस्तक ‘माटी के पंख’ का विमोचन किया। राज्यपाल ने इस मौके पर पुस्तक की विषयवस्तु और लेखन शैली की सराहना करते हुए कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और ‘माटी के पंख’ जैसी कृतियाँ पाठकों के लिए एक बेहतरीन प्रेरणा साबित होंगी। इस विमोचन की जानकारी राज्यपाल के आधिकारिक फेसबुक पेज पर भी साझा की गई है, जहाँ इसे साहित्य प्रेमियों की ज़बरदस्त सराहना मिल रही है।

प्रकृति संरक्षण और इंसानी हौसलों की जुगलबंदी
’माटी के पंख’ सीधे तौर पर प्रकृति संरक्षण का संदेश देती है, जिसे आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत माना जा रहा है। पुस्तक के मुख्य आकर्षण इस प्रकार हैं:
- 21 कहानियों का संग्रह: इस किताब में 21 ऐसी कहानियाँ संकलित हैं जो न केवल प्रकृति के साथ इंसान के गहरे जुड़ाव को रेखांकित करती हैं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने वाले मानवीय हौसलों को बयां करती हैं।
- मूल्य आधारित संदेश: पूरी किताब में दयालुता, पर्यावरण प्रेम, पेड़-पौधों से जुड़ाव और माटी की गरिमा का संदेश छिपा है।
- आभासी दुनिया से दूरी: यह कृति पाठकों को याद दिलाती है कि मोबाइल और कंप्यूटर की स्क्रीन से परे भी एक बेहद खूबसूरत दुनिया है, जहाँ निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करना ही सबसे बड़ी सेवा है।
राज्यपाल के हाथों अपनी पुस्तक का विमोचन होना मेरे लिए अत्यंत गौरव और सौभाग्य का क्षण है। उनका यह प्रोत्साहन मुझे भविष्य में और अधिक बेहतर लेखन के लिए प्रेरित करेगा।
— पूजा अग्रवाल, लेखिका
हर वर्ग के पाठकों के लिए मार्गदर्शक
राज्यपाल रमेन डेका ने विमोचन के दौरान विशेष रूप से ज़िक्र किया कि प्रकृति के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता आज के समय की मांग है। यह किताब बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर आयु वर्ग के पाठक के दिलों को छूने की क्षमता रखती है। यह विपरीत समय में भी मुस्कुराने और जीवन को एक सकारात्मक नज़रिए से देखने का हौसला देती है।
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