मुनाफे की होड़ में भटके अखबार, विश्वसनीयता बचाना युवा पत्रकारों की जिम्मेदारी : डॉ. हिमांशु द्विवेदी

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  • कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में ‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम का आयोजन, हरिभूमि के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को दिए सफलता के मंत्र
  • पत्रकारिता के गिरते स्तर पर जताई चिंता, कहा— सनसनी से दूर रहकर अध्ययनशील बनें विद्यार्थी
  • केटीयू और ‘हरिभूमि’ के बीच मीडिया हाउस लिंकेज को लेकर एमओयू पर हुए हस्ताक्षर

नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। मौजूदा दौर में तेजी से बदलते मीडिया परिदृश्य के बीच पत्रकारिता के समक्ष विश्वसनीयता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। बाजारवाद और मुनाफे की अंधी दौड़ ने समाचार पत्रों की मूल दिशा और प्राथमिकताओं को बदल कर रख दिया है। ऐसे में नई पीढ़ी के पत्रकारों को अपनी क्षमताओं को पहचानते हुए तथ्यात्मक और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता देनी होगी। यह ओजस्वी विचार ‘हरिभूमि’ के प्रधान संपादक एवं वरिष्ठ रणनीतिक विश्लेषक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने व्यक्त किए।

​वे बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (केटीयू), रायपुर में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए आयोजित ‘दीक्षारम्भ’ समारोह के द्वितीय सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल ने की।

पिछले दो दशकों में पत्रकारिता का स्वरूप तेजी से बदला: डॉ. हिमांशु द्विवेदी

​समारोह के मुख्य वक्ता डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने वर्तमान पत्रकारिता की दिशा, चुनौतियों और युवाओं की भूमिका पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में मीडिया जगत में जिस रफ्तार से बदलाव आया है, वैसा इतिहास में कभी नहीं देखा गया।

  • विचारों से व्यापार तक का सफर: पत्रकारिता की शुरुआत समाज कल्याण और विचारों को प्रभावी ढंग से समाज के सामने रखने के पवित्र उद्देश्य से हुई थी। लेकिन आजादी के बाद धीरे-धीरे इस पर व्यावसायिकता हावी होती गई और आज अखबार जनहित का माध्यम बनने के बजाय केवल व्यापार बनकर रह गए हैं।
  • सत्यता परखना पहली शर्त: डॉ. द्विवेदी ने चिंता जताते हुए कहा कि आज के दौर में पत्रकारों की साख घटी है और खबरों पर संशय बढ़ा है। ऐसे में जल्दबाजी में खबर देने की होड़ से बचना चाहिए। किसी भी खबर को प्रसारित या प्रकाशित करने से पहले उसकी सत्यता और प्रमाणिकता परखना बेहद जरूरी है।
  • अध्ययनशीलता को बनाएं हथियार: नवप्रवेशी विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि एक सफल पत्रकार बनने के लिए स्वाध्याय और निरंतर अध्ययन बेहद आवश्यक है। पढ़ाई को अपनी दैनिक जीवनशैली और अनुशासन का हिस्सा बनाएं तथा खुद का निरंतर आकलन करते रहें।

आखिरी स्टोरी और भाषा ही पत्रकार की असली पहचान: प्रो. मनोज दयाल

​अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल ने कहा कि किसी भी पत्रकार के जीवन में उसकी आखिरी स्टोरी और भाषा शैली ही सबसे महत्वपूर्ण होती है। जब पत्रकारिता पर अर्थशास्त्र के सिद्धांत हावी होने लगते हैं, तब वह अपने मूल मार्ग से भटक जाती है।

​उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे सनसनीखेज रिपोर्टिंग और टीआरपी की दौड़ से दूर रहकर अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें और पत्रकारिता की गरिमा को पुनर्स्थापित करें।

‘हरिभूमि’ और KTU के बीच हुआ एमओयू

​कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय और प्रमुख समाचार पत्र ‘हरिभूमि’ के बीच हुआ समझौता (MoU) रहा। इसके तहत मीडिया हाउस लिंकेज और अकादमिक व व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को फील्ड का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके।

गरिमामय उपस्थिति

​समारोह की शुरुआत में पत्रकारिता विभागाध्यक्ष पंकज नयन पांडेय ने स्वागत भाषण दिया। मुख्य अतिथि डॉ. हिमांशु द्विवेदी का औपचारिक परिचय तारिणी सोनी ने कराया। मंच संचालन डॉ. केशव राठौर ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम के संयोजक व विभागाध्यक्ष (प्रबंधन) डॉ. आशुतोष मांडवी ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, अतिथि व्याख्याता और बड़ी संख्या में नवप्रवेशित छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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