विश्व खाद्य दिवस विशेष
रविकांत सिंह राजपूत। नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। विश्व खाद्य दिवस पर, छत्तीसगढ़ का खाद्य सुरक्षा मॉडल दुनिया के सामने एक मिसाल के रूप में खड़ा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने से पहले ही, राज्य ने छत्तीसगढ़ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा अधिनियम, 2012 के तहत अपनी लगभग 88% आबादी को खाद्य सुरक्षा की कानूनी गारंटी दे दी थी। आज, यह राज्य ढाई करोड़ से अधिक लोगों को सम्मानजनक जीवनयापन के लिए खाद्यान्न उपलब्ध करा रहा है।

खाद्य सुरक्षा की गारंटी देकर चाउर वाले बाबा बने तत्कालीन मुख्यमंत्री
इस सफल मॉडल की शुरुआत वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष व तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में हुई थी। अपनी ₹1 और ₹2 किलो चावल की योजना के कारण वे पूरे प्रदेश में ‘चाउर वाले बाबा’ के नाम से लोकप्रिय हुए। तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा अधिनियम, 2012 लागू किया। यह अधिनियम, केंद्र के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम से पहले, राज्य के अधिकांश नागरिकों को खाद्य सुरक्षा का कानूनी अधिकार देने वाला देश का पहला राज्य अधिनियम था। उनकी सरकार ने अंत्योदय और प्राथमिकता वाले परिवारों को अत्यंत कम दर पर (₹1/₹2 प्रति किलो) प्रति माह 35 किलो चावल देने की व्यवस्था की, जिसने राज्य से भुखमरी और कुपोषण को खत्म करने की दिशा में मील का पत्थर साबित किया।
गौरतलब है कि 2004 में, गरीब परिवारों को राशन की दुकान पर चावल मुख्य रूप से ₹3 से ₹5.65 प्रति किलोग्राम के बीच मिलता था, जिसमें अंत्योदय परिवारों को सबसे कम दर पर चावल उपलब्ध था।
कोविड के दौर में भी खाद्य सुरक्षा की गारंटी
खाद्य गारंटी वर्तमान सरकार ने भी इस मॉडल को आगे बढ़ाया है। कोविड-19 महामारी के दौरान, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में, राज्य ने सुनिश्चित किया कि लॉकडाउन के बावजूद कोई भी नागरिक भूखा न रहे। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि जनवरी 2024 से दिसंबर 2028 तक समस्त अंत्योदय और प्राथमिकता कार्डधारियों के लिए चावल की उपभोक्ता दर निःशुल्क होगी, जो खाद्य सुरक्षा के प्रति राज्य की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
महिला सशक्तिकरण का अनूठा पहलू
छत्तीसगढ़ खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2012 की धारा 17(1) के तहत, यह सुनिश्चित किया गया है कि राशन कार्ड के लिए परिवार की वरिष्ठ महिला को मुखिया माना जाए। यह कदम न केवल खाद्य सुरक्षा की गारंटी देता है, बल्कि महिलाओं को परिवार के आर्थिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में सशक्त बनाता है, जो इसे एक सम्पूर्ण सामाजिक सुधार मॉडल बनाता है।
विश्व खाद्य दिवस पर, छत्तीसगढ़ का मॉडल यह बताता है कि खाद्य सुरक्षा केवल आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि यह मानवीय गरिमा और कानूनी अधिकार का विषय है। “चाउर वाले बाबा” से शुरू हुआ यह सफर आज 2 करोड़ से अधिक लोगों की थाली भरने की गारंटी बन चुका है, जो अन्य राज्यों के लिए एक प्रेरणा है।
कुल राशन कार्ड: 82.63 लाख
कुल पंजीकृत सदस्य: लगभग 2.73 करोड़
क्यों मनाया जाता है विश्व खाद्य दिवस
विश्व खाद्य दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य विश्व भर में फैली भूखमरी, कुपोषण और गरीबी की समस्या के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना और इसके समाधान के लिए वैश्विक प्रयासों को प्रोत्साहित करना है। यह दिवस निम्नलिखित प्रमुख लक्ष्यों पर केंद्रित है।
भूख समाप्त करना : दुनिया को याद दिलाना कि हर व्यक्ति को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन प्राप्त करने का अधिकार है। यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य ‘जीरो हंगर’ पर ज़ोर देता है।
खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा: यह सुनिश्चित करना कि खाद्य प्रणालियाँ लचीली हों और सभी के लिए सुरक्षित एवं स्वस्थ भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
कृषि विकास: विकासशील देशों में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने के लिए तकनीकी और वित्तीय सहयोग को प्रोत्साहित करना।
खाद्य बर्बादी रोकना: लोगों को खाने के महत्व को समझाना और खाने की बर्बादी को रोकने के लिए प्रेरित करना।




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