पद गया, पर संघर्ष जारी! पूर्व महापौर के डोमरू रेड्डी का पट्टा दिलाने तक न रुकने का संकल्प

नई पहल न्यूज नेटवर्क। चिरमिरी। प्रशासनिक उदासीनता और मास्टरप्लान के अभाव में अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहे चिरमिरी शहर के निवासियों को उनके घरों का स्थाई मालिकाना हक (पट्टा) दिलाने का अभियान आज भी जारी है। पूर्व महापौर एवं जुझारू नेता के. डोमरू रेड्डी ने अपने दृढ़ संकल्प को दोहराते हुए कहा है कि जब तक चिरमिरी के हर नागरिक को पट्टा नहीं मिल जाता, उनका यह प्रयास निरंतर जारी रहेगा।
हजारों परिवारों का भविष्य जुड़ा
एक बसे-बसाए कोयलांचल शहर का प्रशासनिक बेरुखी के कारण उजड़ना, देश के कई कोयला शहरों की कड़वी सच्चाई है। लेकिन चिरमिरी में इस दुर्भाग्य को स्वीकार करने से इनकार कर दिया गया है। अपने महापौर कार्यकाल में राजस्व सर्वे कराने वाले के. डोमरू रेड्डी ने पद छोड़ने के बाद भी हार नहीं मानी है। उन्होंने एमसीबी जिले के अपर कलेक्टर अनिल सिदार से जनदर्शन में मुलाकात कर, कलेक्टर डी. वेंकट राहुल को एक विस्तृत पत्र सौंपा है। इस पत्र में उन्होंने याद दिलाया है कि एसईसीएल की कोयला उत्खनन के बाद खाली पड़ी 2.94 हेक्टेयर जमीन को शासन को वापस कराने का प्रस्ताव आज भी जिला स्तर पर लंबित है, जिससे हजारों परिवारों का भविष्य जुड़ा है।
रेड्डी का योजनाबद्ध संघर्ष : मुख्यमंत्री स्तर तक मिली थी सफलता
डोमरू रेड्डी का यह संघर्ष सिर्फ एक मांग नहीं, बल्कि एक योजनाबद्ध अभियान रहा है। उन्होंने अपने कार्यकाल में तत्कालीन रमन सरकार और बाद में भूपेश सरकार से सामंजस्य स्थापित कर इस मुद्दे को जनसरोकार का विषय बनाया:
- राजस्व रिकॉर्ड: रेड्डी ने अपने कार्यकाल में सफलतापूर्वक राजस्व सर्वे कराकर नागरिकों के घरों का राजस्व रिकॉर्ड बनवाने में सफलता पाई।
- सरकारी निर्णय: उनकी पहल पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक (जून 2019) में एसईसीएल की अनुपयोगी जमीनों को शासन को वापस कराने के निर्देश जारी किए थे।
- उच्च स्तरीय समिति: इस विषय पर संभाग आयुक्त की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति भी बनाई गई थी, और चिरमिरी के तानसेन भवन में एक बड़ी बैठक भी आयोजित हुई थी।
गति धीमी होने का कारण: रेड्डी ने कलेक्टर को अवगत कराया है कि सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, बार-बार हो रहे अधिकारियों के स्थानांतरण और कुछ स्थानीय नेताओं तथा अधिकारियों की सुस्त कार्यशैली के कारण यह जनहित का कार्य कागजों में सिमटकर रह गया।
70-80 वर्षों से बसे लोगों का हक लंबित
पूर्व महापौर ने कलेक्टर को स्मरण कराया है कि चिरमिरी और ऐसे ही दूसरे कोयला उत्खनन वाले क्षेत्रों में लोग 70 से 80 वर्षों से निवास कर रहे हैं। इन निवासियों को उनके घरों एवं दुकानों का मालिकाना हक दिलाना, न केवल न्याय है बल्कि शहर के अस्तित्व के लिए भी अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि एसईसीएल ने भी अपने लीज की 2.94 हेक्टेयर जमीन चिन्हित कर वापसी का प्रस्ताव कलेक्टर कार्यालय को भेजा था, लेकिन वह प्रस्ताव आज भी धूल फांक रहा है।
राजनीति नहीं, अस्तित्व का मुद्दा
जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष का दायित्व संभाल रहे श्री रेड्डी ने स्पष्ट कहा है कि यह मुद्दा राजनीति का नहीं, बल्कि चिरमिरी और ऐसे दूसरे शहरों के अस्तित्व तथा पलायन का एक गंभीर विषय है। उन्होंने कलेक्टर श्री राहुल वेंकट से आग्रह किया है कि विशेष टास्क फोर्स बनाकर मुख्यमंत्री के निर्देशों पर रुके हुए क्रियान्वयन को तत्काल आगे बढ़ाया जाए।



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