वीडियो : कांवर उठाकर शिवभक्ति में लीन हुए स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल, कल परिवार सहित बाबा धाम में करेंगे जलाभिषेक

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छूरिगढ़ धाम की पवित्र यात्रा में कांवर उठाकर मंत्री ने भक्तों संग तय किया दो किमी का पैदल सफर

कभी सिर पर शिवलिंग, कभी डमरू-गदा के साथ शिवभक्ति में लीन दिखे मंत्री श्यामबिहारी

नई पहल न्यूज नेटवर्क। बैकुंठपुर। सावन के तीसरे सोमवार पर शिवभक्ति के अद्भुत रंग में रंगा कोरिया जिला आज साक्षी बना एक भव्य और ऐतिहासिक कांवर यात्रा का, जो प्रेमाबाग, बैकुंठपुर से प्रारंभ होकर प्रसिद्ध छूरिगढ़ धाम तक पहुंची। इस आध्यात्मिक यात्रा में हजारों शिवभक्तों के साथ शामिल हुए छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य मंत्री और मनेंद्रगढ़ विधायक श्री श्यामबिहारी जायसवाल, जिन्होंने न केवल कांवर उठाई, बल्कि पूरे जोश और आस्था के साथ भक्तों संग पैदल चलकर शिवपथ को जीवंत कर दिया। श्री जायसवाल ने 104 वर्षीय प्राचीन शिव मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर यात्रा की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने सिर पर भगवान शिव की प्रतिमा उठाई, डमरू और गदा के साथ “हर हर महादेव” के जयघोष करते हुए करीब दो किलोमीटर पैदल यात्रा की। भक्ति में डूबे मंत्री का यह रूप लोगों के लिए प्रेरणा बन गया। श्रद्धालु भी जोश और उमंग से झूम उठे। मंत्री की अगुवाई में सैकड़ों कांवरिए शिवधुन के साथ पंक्तिबद्ध होकर छूरिगढ़ धाम की ओर बढ़ते गए। छूरिगढ़ धाम तक कुल यात्रा आठ किलोमीटर की होती है, जिसमें भक्त पवित्र जल लेकर भोलेनाथ को अर्पित कर सावन सोमवार की विशेष पूजा करते हैं। इस यात्रा के दौरान स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के विशेष प्रबंध भी किए गए थे। इस मौके पर नगरपालिका अध्यक्ष नविता शैलेश शिवहरे, वरिष्ठ भाजपा नेता शैलेश शिवहरे, स्थानीय जनप्रतिनिधि, भाजपा कार्यकर्ता और हजारों की संख्या में शिवभक्त शामिल हुए।

कल जाएंगे बाबा धाम, परिवार संग करेंगे जलाभिषेक

स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल कल अपने पूरे परिवार के साथ बाबा धाम में हाजिरी देंगे। वे भगवान शिव का जलाभिषेक कर प्रदेशवासियों और क्षेत्र की सुख-समृद्धि, आरोग्यता एवं खुशहाली के लिए विशेष प्रार्थना करेंगे। उनकी यह निरंतर शिवभक्ति और धार्मिक आस्था न केवल राजनीतिक जीवन को आध्यात्मिक दिशा देती है, बल्कि जनमानस में उन्हें एक जनप्रिय, आस्थावान जननेता के रूप में स्थापित करती है।

कांवर यात्रा बना श्रद्धा, संस्कृति और जनसंपर्क का संगम

यह यात्रा केवल भक्ति का प्रतीक नहीं थी, बल्कि एक सांस्कृतिक आंदोलन बनकर सामने आई, जिसने धर्म, सेवा, जनजुड़ाव और शिव-समर्पण की अनुपम मिसाल पेश की। मंत्री का सादगी भरा, उत्साही व भक्ति से परिपूर्ण आचरण जनमानस में गहरी छाप छोड़ गया।

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