झारखंड के दिशोम गुरु शिबू सोरेन नहीं रहे, एक युग, एक आंदोलन, एक आवाज़ हमेशा के लिए खामोश हो गई

नई पहल न्यूज नेटवर्क। रांची/नई दिल्ली। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक और तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके वरिष्ठ आदिवासी नेता शिबू सोरेन का सोमवार सुबह दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे और बीते कई हफ्तों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके निधन से झारखंड सहित पूरे देश में शोक की लहर है। उनके पुत्र और राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर पिता के निधन की जानकारी दी और लिखा— “आज मैं शून्य हो गया…”
बीमारी और निधन

शिबू सोरेन को कुछ सप्ताह पहले किडनी और उम्रजनित जटिलताओं के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लगातार बिगड़ती हालत के चलते उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। सोमवार सुबह 08:56 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
जीवन परिचय
जन्म: 11 जनवरी 1944, नेमरा गाँव, रामगढ़
राजनीतिक जीवन की शुरुआत: 1970 के दशक में
JMM की स्थापना: 1973 में झारखंड आंदोलन के तहत
झारखंड के मुख्यमंत्री: तीन बार (2005, 2008, 2009)
केंद्र सरकार में भूमिका: कोयला मंत्री रहे
लोकप्रिय उपनाम: ‘दिशोम गुरु’ (आदिवासी समुदाय के मार्गदर्शक)
संघर्ष और योगदान
शिबू सोरेन झारखंड राज्य निर्माण आंदोलन के प्रमुख नेता थे। उन्होंने दशकों तक आदिवासी अधिकारों के लिए संघर्ष किया। 15 नवंबर 2000 को जब झारखंड बिहार से अलग होकर स्वतंत्र राज्य बना, तो यह सोरेन के संघर्षों की ऐतिहासिक परिणति मानी गई। वे हमेशा झारखंड के मूल निवासियों, किसानों, मजदूरों और आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई के अग्रणी सिपाही रहे। वे ऐसे राजनेता थे, जो ज़मीन से जुड़े थे और हर वर्ग की आवाज़ बनकर उभरे।
राजनीतिक सफर
शिबू सोरेन तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे, हालांकि कोई भी कार्यकाल पूर्ण नहीं कर सके। उन्होंने कई बार लोकसभा और राज्यसभा का प्रतिनिधित्व किया। कोयला मंत्री के रूप में उन्होंने नीतिगत बदलाव लाने की कोशिशें कीं। हालांकि, उनके राजनीतिक जीवन में कुछ विवाद भी रहे, जिनसे वे समय के साथ उबरते गए।
नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
उनके निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, और झारखंड के कई वरिष्ठ नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। झारखंड सरकार ने राजकीय शोक की घोषणा करते हुए कहा है कि अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
शोक में झारखंड
झारखंड में हर आंख नम है। उनके गांव से लेकर राज्य की राजधानी तक शोक सभा आयोजित की जा रही है। स्कूल, कॉलेज और सरकारी संस्थानों में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जा रही हैं। शिबू सोरेन का जाना केवल एक नेता का निधन नहीं, बल्कि एक विचार, एक आंदोलन और एक युग का अंत है। उन्होंने झारखंड को सिर्फ एक भौगोलिक पहचान नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और अधिकारों की चेतना दी। उनकी राजनीतिक विरासत अब उनके पुत्र हेमंत सोरेन के कंधों पर है, जिन्हें अब एक पिता ही नहीं, बल्कि अपने ‘दिशोम गुरु’ की विरासत को भी संभालना होगा।


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